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Fodder scam: लालू की बढ़ेंगी मुश्किलें, कुछ दिनों बाद चारा घोटाले मामले में आएगा फैसला

Ranchi: Fodder scam: चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले में जनवरी माह में फैसला आ सकता है। एक बार फिर से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सिर्फ तीन आरोपियों की ओर की ओर से बहस पूरी होते ही अदालत इस मामले में फैसले की तिथि निर्धारित कर देगी। हालांकि अदालत ने इस मामले में आरोपियों की सही जानकारी के लिए सभी की उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह ने बताया कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद समेत मुकदमे का सामना करे रहे आरोपियों को नए साल में कोर्ट खुलते ही उपस्थिति दर्ज करानी होगी। हालांकि आरोपियों को व्यक्तिगत उपस्थिति की जगह अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की छूट है।

इधर, लालू प्रसाद का इलाज दिल्ली में चल रहा है। संभावना ज्यादा है कि उनके अधिवक्ता की ओर से उनकी उपस्थित दर्ज कराई जाएगी। वर्तमान में इस मामले में 102 आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इसमें से लालू प्रसाद समेत 99 आरोपियों की ओर से बहस पूरी हो चुकी है। बाकी तीन आरोपियों की ओर से तीन-चार जनवरी को बहस की जाएगी। बहस पूरी कर चुके एक-दो आरोपितों के मौत हो जाने की सूचना है।

इसे भी पढ़ेंः Good News: नए साल में अधिवक्ताओं के लिए खुशखबरी, जाने क्या है स्टेट बार काउंसिल का फैसला

लेकिन उनकी ओर से अदालत में मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं दाखिल किया गया है। मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत वर्तमान में मुकदमे का सामना कर रहे आरोपितों की सही संख्या जानने को लेकर उपस्थिति दर्ज करने का निर्देश दिया है। बता दें कि डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़े मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, जगदीश शर्मा, डॉ. आरके शर्मा, ध्रुव भगत, पांच आइएएस, 30 पशु चिकित्सक, छह एकाउंट व 56 आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।

पिछले दिनों लालू प्रसाद की ओर से सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसके शशि की अदालत में बहस पूरी कर ली गई। इस दौरान उनके अधिवक्ता प्रभात कुमार ने कहा कि 1990 में स्कूटर, बाइक सहित अन्य वाहन से मवेशी ढोए गए थे। इसके नाम पर कोषागार से 26 हजार रुपये की निकासी की गई थी। इसमें लालू प्रसाद की कोई भूमिका नहीं है।

पशुपालन मंत्री रामजीवन सिंह ने इसकी जांच सीबीआई कराने की बात कही, क्योंकि इसका फंड केंद्र से आता था। इस पर लालू प्रसाद तत्कालीन मुख्य सचिव मंतव्य मांगा। मुख्य सचिव ने कहा था कि मेरी बात सीबीआई निदेशक से हुई। निदेशक ने कहा कि वह इस तरह के मामले की जांच नहीं करते हैं। इसलिए इसकी जांच सीआईडी या निगरानी से कराई जाए। इसके बाद लालू प्रसाद ने निगरानी से जांच कराने का आदेश दिया। इसमें लालू प्रसाद कहीं से भी दोषी नहीं है।

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