रिम्स के बदतर हालात को सुधारने के लिए क्या कर रही झारखंड सरकारः हाईकोर्ट

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य से सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के हालात पर टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि रिम्स के हालात बदतर हैं। कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए रिम्स के चिकित्सक और नर्स बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन फिर भी वहां के हालात बदतर है। रिम्स के कई विभागों में पद रिक्त हैं और उस पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है। वर्तमान में रिम्स में स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। यह भी प्रभार में ही चल रहा है। इसके बाद अदाल ने रिम्स निदेशक के पूर्णकालिक नियुक्ति और रिम्स में रिक्त पदों पर की पूरी जानकारी मांगी है।

अदालत ने राज्य सरकार को यह बताने को कहा है कि रिम्स में पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति में इतनी देरी क्यों हो रही है। प्रभारी निदेशक के पास सीमित अधिकार होते हैं, ऐसे में वे कई मामलों में फैसले नहीं ले सकते हैं। ऐसे में रिम्स निदेश की जल्द नियुक्ति होनी चाहिए। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि कोरोना संक्रमण में चिकित्सक व नर्सेस बेहतर काम कर रही हैं, लेकिन प्रबंधन की कमी के चलते रिम्स के हालात बदतर हो गए हैं। रिम्स के हालात को सुधारने के लिए राज्य सरकार क्या रही है। इसकी विस्तृत जानकारी रिम्स व राज्य सरकार को देने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तिथि निर्धारित की है।

राज्य के बड़े अस्पताल की हालत खराब


अदालत ने कहा कि राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है रिम्स। यहां के इलाज पर सभी को भरोसा है और पूरे राज्य के मरीज यहां इलाज कराने आते हैं। लेकिन हालत खराब होने पर वहां पर मरीजों की सेवा कैसे होगी। अदालत ने कहा कि कोरोना संक्रमण से लड़ने वाले चिकित्सक और नर्सों भारी कमी है। क्योंकि रिक्त पदों पर नियुक्ति ही नहीं हो रही है। इस दौरान अधिवक्ता धीरज कुमार ने कहा कि प्लाज्मा डोनेट करने के लिए रिम्स में मशीन तो लगा दी गई है, लेकिन उसको चलाने वाले तकनीशियन और सहयोग करने वाले कर्मचारियों की कमी है। इसके बाद अदालत ने रिम्स व सरकार से पूरे रिम्स में सभी विभागों के रिक्त पदों और सृजित पदों की विस्तृत जानकारी मांगी है। इस मामले में अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है।

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