Supreme Court News

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पत्नी पति की गुलाम नहीं, साथ रहने को नहीं कर सकते मजबूर

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 04 Mar, 2021
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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी अपने पति की गुलाम या विरासत नहीं होती है जिसे पति के साथ जबरन रहने को कहा जाए। कोर्ट ने यह टिप्पणी ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की जिसमें पति ने कोर्ट से अपनी पत्नी को साथ रहने का आदेश देने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन और हेमंत गुप्ता ने कहा किआपको क्या लगता है? क्या एक महिला गुलाम या संपत्ति है जो हम ऐसे आदेश दें? क्या महिला कोई संपत्ति है जिसे हम आपके साथ जाने को कहें?

विवाद के मूल में दांपतिक अधिकारों की बहाली पर एक अप्रैल 2019 का आदेश है, जो कि गोरखपुर के फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह ऐक्ट के सेक्शन 9 के तहत पति के हक में दिया गया था। महिला का दावा था कि साल 2013 में शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए पति ने प्रताड़ित किया।

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साल 2015 में महिला ने गोरखपुर कोर्ट में याचिका दाखिल कर पति से गुजारा-भत्ता की मांग की थी। कोर्ट ने पति को 20 हजार रुपये हर महीने पत्नी को देने का आदेश दिया था। इसके बाद पति ने कोर्ट में दांपतिक अधिकारों की बहाली के लिए अपनी याचिका दायर की थी।

गोरखपुर के फैमिली कोर्ट के आदेश के बाद पति ने हाई कोर्ट का रुख किया और याचिका दायर कर गुजारा-भत्ता दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह अपनी पत्नी के साथ रहने को तैयार है तो इसकी जरूरत क्यों है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी जिसके बाद शख्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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अपने बचाव में महिला ने यह दलील दी कि उसके पति का पूरा खेल गुजारा-भत्ता देने से बचने के लिए है। महिला के वकील ने कोर्ट को यह भी कहा कि पति तभी फैमिली कोर्ट भी गया जब उसे पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश मिला।

पति की ओर से लगातार पत्नी को साथ रहने का आदेश दिए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी दी और पति की उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने दांपतिक अधिकारों को बहाल करने की मांग की थी।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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