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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- तीन सप्ताह में सूचना आयुक्तों की करें नियुक्ति, नहीं तो झारखंड के मुख्य सचिव होंगे कोर्ट में पेश

Information Commissioners appointment News झारखंड में राज्य सूचना आयुक्तों के सभी पद खाली होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

Ranchi: Information Commissioners appointment झारखंड में राज्य सूचना आयुक्तों के सभी पद खाली होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि तीन सप्ताह में अगर मुख्य सचिव मुख्य सूचना आयुक्तों के पदों पर नियुक्ति करने में विफल होते हैं तो कोर्ट से उन्हें अदालत में पेश होने का आदेश देगी।

इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की खंडपीठ में हुई। रांची के रहने वाले शैलेष पोद्दार ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की मांग की है। हालांकि इस तरह के मामले में वादी अंजली भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

अजंली की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड को छोड़कर सभी राज्यों से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर रिपोर्ट मांगी थी। इसकी जानकारी के बाद वादी शैलेश पोद्दार के अधिवक्ता ने उनके मामलों की सुनवाई के लिए विशेष आग्रह किया था।

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अदालत ने इस मामले को भी अंजली भारद्वाज के मामले के साथ टैग कर दिया गया। सुनवाई के दौरान पोद्दार के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि झारखंड में मई 2020 से सूचना आयुक्त के सभी पद खाली हैं। ऐसे अपील सहित अन्य शिकायतों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।

झारखंड सरकार के अधिवक्ता की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय की मांग की गई, लेकिन अदालत ने कहा कि जब मामले में आठ माह पहले राज्य सरकार को नोटिस जारी किया गया था, उनकी ओर से अब तक जवाब क्यों नहीं दाखिल किया गया।

अदालत ने सरकार के अधिवक्ता को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अगली सुनवाई तक सूचना आयुक्तों के सभी पदों पर नियुक्ति नहीं की जाती है तो मुख्य सचिव को अदालत में पेश होकर जवाब देना पड़ेगा। दालत ने देश के सभी राज्यों से इस मामले में जवाब मांगा है।

बता दें कि राज्य में सूचना आयुक्त के दस पद निर्धारित हैं। इसके पीछे नेता प्रतिपक्ष का नहीं होना बताया जा रहा था, लेकिन सरकार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी कमेटी में मंत्री चंपई सोरेन को नेता प्रतिपक्ष की जगह पर मनोनीत किया गया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

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