रांची। झारखंड के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में राज्य में संविदा पर काम करने वाले चिकित्सकों की ओर से नियुक्ति में उम्र में छूट की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया। इसमें कहा गया कि संविदा पर काम करने वाले चिकित्सकों को नियुक्ति में उम्र की छूट नहीं दी जा सकती है। हालांकि भविष्य की नियुक्ति में इनके मामले में विचार किया जा सकता है।

इस पर प्रार्थी की ओर से विज्ञापन में उम्र के कट ऑफ डेट को घटाने की मांग की गई। इस मसले पर अदालत ने विस्तृत सुनवाई के लिए 9 नवंबर की तिथि निर्धारित की है। इसको लेकर डॉ अमित कुमार सिन्हा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता ऋषि पल्लव व ओमिया अनुषा ने अदालत को बताया कि जेपीएससी ने राज्य में चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला है। वे लोग राज्य में संविदा पर काम कर रहे हैं।

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लेकिन उनकी उम्र ज्यादा होने की वजह से वे आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। राज्य सरकार ने छह साल बाद चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। इसके चलते कई चिकित्सक की आवेदन करने की उम्र से ज्यादा हो गया है। इसमें इनकी नहीं बल्कि सरकार की गलती है। अगर सरकार पहले ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर देती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इसलिए विज्ञापन में दिए गए उम्र के कट ऑफ डेट एक अगस्त 2020 को की जगह एक अगस्त 2015 कर दिया जाए।

इसके बाद उम्र में छूट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अधिवक्ता ऋषि पल्लव ने अदालत को बताया कि झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वर्ष 2009 में संजीव कुमार सहाय बनाम झारखंड सरकार के मामले ऐसा करने का आदेश दिया था। इस पर सरकार और जेपीएससी की ओर से इस दलील का विरोध किया गया। इसके बाद अदालत ने कहा कि इस मामले में विस्तृत सुनवाई किए जाने की जरूरत है। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए नौ नवंबर की तिथि निर्धारित की है।