रांची। हजारीबाग में नाबालिग बच्ची को एसिड पिलाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरा अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि इस मामले में पीड़िता का पक्ष भी जानने की जरूरत है। अगर पीड़िता हाईकोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना चाहती है, वह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) या फिर झालसा के माध्यम से उपस्थित हो सकती है।

पीडिता के कोर्ट में उपस्थिति की इच्छा जताने पर डालसा उसकी अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित कराए। वहीं, हजारीबाग के जिला जज इस बात का ध्यान रखें कि उसे अदालत में उपस्थित होने के लिए दबाव नहीं दिया जाए। सुनवाई के दौरान हजारीबाग के एसपी और केस के अनुसंधानकर्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में हाजिर हुए थे। इस दौरान सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने अदालत को बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में केस डायरी प्रस्तुत किया गया है।

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इसके बाद अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए छह नवंबर की तिथि निर्धारित की है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि पुलिस की जांच की दिशा से ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी को बचाया जा रहा है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को केस डायरी प्रस्तुत करने को कहा था। बता दें कि हाईकोर्ट की अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने इसको लेकर चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था कि हजारीबाग में एक नाबालिग को एसिड पिलाया गया। चीफ जस्टिस ने इसपर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में बदला था।