जलाशय संरक्षण पर हाईकोर्ट ने कहा- हालात सुधारें नहीं, तो नई पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी

Reservoir Conservation कोर्ट कहा कि उनकी मंशा किसी को गलत ठहराने की नहीं है बल्कि हम चाहते हैं कि गलतियों से सीख लेते हुए हालात को सुधारें। ऐसा नहीं हुआ तो भावी पीढ़ी को शुद्ध जल नहीं मिलेगा और वह हमें माफ नहीं करेगी।

रांचीः झारखंड हाई कोर्ट ने रांची के सभी जलाशयों को सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त करने के मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार को जलाशयों को संरक्षित रखने के लिए गंभीरता दिखानी होगी, लेकिन अभी तक के प्रयास ऐसा नहीं लग रहा हैं।

अदालत इस मामले को लेकर गंभीर है और किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं करेगी। कोर्ट कहा कि उनकी मंशा किसी को गलत ठहराने की नहीं है बल्कि हम चाहते हैं कि गलतियों से सीख लेते हुए हालात को सुधारें। ऐसा नहीं हुआ तो भावी पीढ़ी को शुद्ध जल नहीं मिलेगा और वह हमें माफ नहीं करेगी।

चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की पीठ रांची के जलाशयों में हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान अदालत ने उक्ट टिप्पणी की है।

अदालत ने रांची नगर निगम और सरकार को जलाशयों से अतिक्रमण हटाने और भावी योजना की रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया। क्योंकि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय देने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

सुनवाई के दौरान पेयजल संकट को लेकर दाखिल जनहित याचिका के न्यायमित्र इंद्रजीत सिन्हा ने कहा कि हटिया डैम के आसपास बने रिंग रोड और अन्य तरह की घेराबंदी से डैम में पानी का बहाव रूक गया है। इससे डैम में बरसात का पानी नहीं पहुंच रहा है।

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यही स्थिति कांके और गेतलसूद डैम की हो गयी है। समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो दोनों डैम से भी लोगों का पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा। इस पर अदालत ने अगले सप्ताह इस संबंध में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।

अधिवक्ता को सुरक्षा नहीं मिलने पर एसएसपी से जवाब तलब

बड़ा तालाब से अतिक्रमण हटाने और इसकी सफाई को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाली अधिवक्ता खुशबू कटारूका को सुरक्षा प्रदान नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन ने रांची के एसएसपी से जवाब मांगा है।

अदालत ने पूछा है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी उन्होंने अधिवक्ता को सुरक्षा क्यों नहीं उपलब्ध कराया। अधिवक्ता ने पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया था कि प्रशासन की ओर से अतिक्रमणकारियों को जो नोटिस दिया जा रहा है उसमें खूशबू कुमारी केस का उल्लेख किया जा रहा है। इस कारण उन्हें कई लोगों के फोन आ रहे हैं। इस पर कोर्ट ने एसएसपी को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।

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