processApi - method not exist
Home Supreme Court News Murder case: पुलिस जांच के तौर तरीकों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई...

Murder case: पुलिस जांच के तौर तरीकों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- पुलिस अधिकारियों को करनी चाहिए निष्पक्ष जांच

New Delhi: Murder case: एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के जांच के तौर तरीकों पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। एक जांच अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह हर पहलू को टटोलते हुए निष्पक्ष जांच करे, न कि अतिउत्साह में गैर इरादतन हत्या के केस में भी आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला बनाने लगे। इस टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में आरोपी सात लोगों को रिहा करने का आदेश दिया।

जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि गैर इरादतन हत्या और हत्या के मामले में सजा की गंभीरता बदल जाती है। जांच अधिकारी को इसमें सजग रहने की जरूरत है। यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह पहले तय करे कि मामला गैर इरादतन हत्या का है या सिर्फ हत्या का। क्योंकि सिर्फ हत्या के मामले में अपराध का इरादा निहित है।

अपने 42 पन्ने के आदेश में जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि जरूरी है कि जांच अधिकारी के सोचने के तरीके में एक व्यवहार्य परिवर्तन आए। क्योंकि बतौर पुलिसकर्मी वह इस कोर्ट का भी एक अधिकारी के तौर पर जांच कर रहा होता है। यह उसका कर्तव्य है कि वह सच्चाई का पता लगाए और सही निष्कर्ष तक पहुंचने में अदालत की मदद करे। 

इसे भी पढ़ेंः Insurance scam: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बीसीआई ने निलंबित किए यूपी के 28 वकील, 300 करोड़ की चपत से बची कंपनियां

सुप्रीम कोर्ट हत्या के मामले में दोषियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राजस्थान के एक भूमि विवाद में 18 जुलाई 1989 को लड्डूराम, मोहन और बृजेंद्र की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दो सुनवाई हुईं। पहली में कोर्ट ने दो दोषियों को बरी किया और पांच को दोषी करार दिया।

इसके बाद हाईकोर्ट ने एक और दोषी को बरी कर दिया और शेष चार को सजा सुना दी। इसके बाद 10 और आरोपियों को इस मामले में शामिल किया गया ओर दूसरी बार फिर सुनवाई शुरू हुई। इस बार चार को सजा सुनाई गई और एक को जुवेनाइल बोर्ड के पास भेज दिया गया व शेष पांच को बरी कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस बार चारों को बरी कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बाकी के चार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

RELATED ARTICLES

6th JPSC Exam: सुप्रीम कोर्ट में बोली झारखंड सरकार, नौकरी से निकाले गए 60 को नहीं कर सकते समायोजित

6th JPSC Exam: छठी जेपीएससी नियुक्ति को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी पर सुनवाई...

Mediclaim Policy पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, कहा-बीमा किया है तो देना होगा क्लेम

New Delhi: Mediclaim Policy सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक बार बीमा करने के बाद बीमा कंपनी प्रस्तावक फार्म में उजागर...

धर्म संसद में नरसंहार के आह्वान का आरोप, CJI को वकीलों ने लिखा पत्र; संज्ञान लेने की मांग

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट के 76 अधिवक्ताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना को पत्र लिखा है। पत्र में हरिद्वार...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

जेएसएससी नियुक्ति में राज्य के संस्थान से 10वीं व 12वीं की परीक्षा पास होने की अनिवार्य शर्त पर झारखंड सरकार कायम

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ में जेपीएससी परीक्षा नियुक्ति में दसवीं और...

ईडी को ललकारने वाले सीएम हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा से छह दिन होगी पूछताछ

अवैध खनन और टेंडर मैनेज करने से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में गिरफ्तार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बरहेट विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा...

6th JPSC Exam: सुप्रीम कोर्ट में बोली झारखंड सरकार, नौकरी से निकाले गए 60 को नहीं कर सकते समायोजित

6th JPSC Exam: छठी जेपीएससी नियुक्ति को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी पर सुनवाई...

जांच अधिकारी ने नहीं दी गवाही, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक निर्मला देवी साक्ष्य के अभाव में बरी

पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी पत्नी पूर्व विधायक निर्मला देवी समेत चार आरोपी को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में...