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Insurance scam: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बीसीआई ने निलंबित किए यूपी के 28 वकील, 300 करोड़ की चपत से बची कंपनियां

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 23 Nov, 2021
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New Delhi: Insurance scam बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने फर्जी मोटर बीमा दावा दायर करने वाले उत्तर प्रदेश के 28 वकीलों को कदाचार के आरोप में निलंबित कर दिया। घोटाले के खुलासे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) को जांच सौंपी थी, जिससे बीमा कंपनियों को 300 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगने से बच गई।

बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वकीलों का निलंबन किया है। वकीलों के नाम प्रदेश बार काउंसिल को भेजकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ तीन महीने में जांच करने और रिपोर्ट बीसीआई को भेजने के भी निर्देश हैं। सभी मामलों की सुनवाई पूरी होने तक निलंबित रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में पांच अक्तूबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने पाया था कि एसआईटी ने यूपी के जिलों में जो 92 मामले दर्ज किए हैं, उनमें से 55 में 28 वकीलों के नाम शामिल हैं। इनमें से 32 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, अदालत में आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। पीठ ने सुनवाई के दौरान वकीलों पर कार्रवाई न होने पर गहरी नाराजगी भी जताई थी।

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एसआईटी गठन के बाद 1376 संदिग्ध दावों की शिकायत आई। अबतक महज ढाई सौ की जांच पूरी हो पाई है।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण एवं कामगार मुआवजा कानून के तहत बीमा कंपनियों व अलग-अलग अधिकरणों ने कुल 233 दावों को संदिग्ध या फर्जी पाते हुए 300 करोड़ रुपये से अधिक के दावे खारिज किए।

उत्तर प्रदेश में फर्जी मोटर बीमा दावा दायर करने के फर्जीवाड़े की जांच छह साल से एसआईटी कर रही है। 2015 में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने आया था। विभिन्न बीमा कंपनियों ने अलग-अलग अदालतों में फर्जी बीमा दावे का आरोप लगाते हुए मामले दर्ज किए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सात अक्तूबर 2015 को प्रदेश सरकार से एसआईटी गठित कर जांच करवाने के आदेश दिए थे।

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फर्जी दावों के सबसे अधिक 12 मामले सहारनपुर में दर्ज हैं। मेरठ में नौ, मुरादाबाद सात, अलीगढ़ छह, गाजियाबाद-हापुड़ पांच-पांच, रायबरेली में तीन, इटावा व लखनऊ में दो-दो, अयोध्या, मैनपुरी, मुजफ्फरनगर व उन्नाव में एक-एक मामले दर्ज हैं।

बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यूपी बार काउंसिल की मदद नहीं मिल रही है। पीठ ने एसआईटी को फर्जीवाड़े में शामिल वकीलों के नाम सीधे बीसीआई को भेजने के निर्देश दिए। एसआईटी ने उसी दिन ई-मेल से नाम उपलब्ध करा दिए। 19 नवंबर को बीसीआई ने वकीलों को निलंबित कर दिया।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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