Ranchi news: झारखंड हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी राज कुमार को बड़ी राहत देते हुए उनकी बर्खास्तगी का आदेश रद कर दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने बर्खास्तगी की सजा को बदलते हुए दो वार्षिक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने का दंड दिया है।
अदालत ने बैंक को राज कुमार को तत्काल सेवा में बहाल करने और संशोधित दंड के अनुसार परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया है। पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा गया है।
बिना विभागीय जांच के दोषसिद्धि उचित नहीं
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विभागीय जांच के दौरान अधिकारी के 26 जुलाई 2024 के पत्र को बिना शर्त आरोप स्वीकार करने वाला मान लिया गया, जबकि उसी पत्र में उन्होंने आरोपों के मूल आधार और किसी गलत मंशा से इनकार किया था। ऐसे में केवल उस पत्र के आधार पर विभागीय जांच समाप्त कर आरोपों को सिद्ध मान लेना उचित नहीं था।
बोकारो ब्रांच में थे कार्यरत
राज कुमार मई 2009 में बैंक ऑफ इंडिया में प्रोविजनल अफसर के पद पर नियुक्त हुए थे। वह बोकारो स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल शाखा में 5 जून 2017 से 10 अगस्त 2020 तक सीनियर ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे। बैंक ने 23 अप्रैल 2024 को उन्हें पांच आरोपों को लेकर आरोप पत्र जारी किया था।
इनमें बैंक के नियमों का उल्लंघन कर ऋण स्वीकृत करने, स्वीकृत ऋण की निगरानी नहीं करने, पत्नी से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए हाउसिंग लोन स्वीकृत करने और कुछ ऋण खातों में कथित तौर पर अनुचित सुविधा देने के आरोप शामिल थे।
विभागीय कार्यवाही के दौरान 26 जुलाई 2024 को अधिकारी से आरोप स्वीकार करने या इनकार करने को कहा गया। उन्होंने अपने पत्र में आरोप स्वीकार करने की बात कही, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि संबंधित ऋण वास्तविक थे, उन्हें किसी तरह का व्यक्तिगत लाभ नहीं मिला और किसी प्रकार की दुर्भावना साबित नहीं हुई है। उन्होंने प्रबंधन से मामले में नरम रुख अपनाने का अनुरोध भी किया था।
अदालत ने जांच की प्रक्रिया पर उठाया सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोप की स्वीकारोक्ति स्पष्ट, विशिष्ट, बिना शर्त और निर्विवाद होनी चाहिए। अदालत ने पाया कि राज कुमार के पत्र में आरोपों के मूल आधार और कथित निजी लाभ से इनकार किया गया था। इसके बावजूद उसी दिन बिना गवाहों के बयान दर्ज किए, दस्तावेजों का औपचारिक प्रमाण कराए और जिरह का अवसर दिए बिना विभागीय जांच पूरी कर आरोप सिद्ध मान लिए गए।
अदालत ने कहा कि सेवा से हटाना उपलब्ध कठोर दंडों में से एक है। मौजूदा परिस्थितियों में बर्खास्तगी की सजा अत्यधिक कठोर और असंगत है। इसलिए 4 अक्टूबर 2024 के बर्खास्तगी आदेश और 20 जनवरी 2025 के अपीलीय आदेश को रद्द किया जाता है।

