high court news

HC News: फैसला: पेट्रोल पंप डीलरशिप रद्द करने के IOCL के फैसले पर मुहर, संजय कुमार दुबे की अपील खारिज

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 26 Sep, 2026
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
High court news
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

 अदालत ने स्पष्ट किया—जरूरी रकबे से कम जमीन होने पर ग्रुप-1 में दावा नहीं टिकता; याचिकाकर्ता की लापरवाही और देरी से तीसरे पक्ष का अधिकार बन चुका है।

Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा पेट्रोल पंप (रिटेल आउटलेट) डीलरशिप आवंटन रद्द करने के निर्णय को वैध ठहराते हुए अपीलकर्ता संजय कुमार दुबे की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार न्यूनतम आवश्यक भूमि (रकबा और आयाम) न होने की स्थिति में आवेदक को ‘ग्रुप-1’ श्रेणी के तहत पात्र नहीं माना जा सकता।

क्या था पूरा मामला और विवाद?

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 25 नवंबर 2018 को ‘द टेलीग्राफ’ अखबार में विज्ञापन जारी कर झारखंड के विभिन्न स्थानों पर रेगुलर/ग्रामीण रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) डीलरशिप के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इसमें चतरा जिले के कन्हाचट्टी ब्लॉक से उंटामोर्स की ओर 2 kms के दायरे में पेट्रोल पंप के लिए आवेदन मांगे गए थे।

See also  शराब पीकर कोर्ट आने वाला वकील अवमानना का दोषी

संजय कुमार दुबे ने इस डीलरशिप के लिए आवेदन किया और प्लॉट नंबर 166 व 167 (मौजा-तत्रा, कन्हाचट्टी, चतरा) के कागजात संलग्न किए। 21 जून 2019 को हुए ड्रॉ ऑफ लॉट्स में उन्हें सफल घोषित किया गया और 40,000 रुपये का प्रारंभिक सुरक्षा जमा (Initial Security Deposit) भी जमा करा लिया गया। इसके बाद, IOCL की लैंड एवैल्यूएशन कमेटी (LEC) ने 23 अक्टूबर 2019 को स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जिस प्लॉट (प्लाट नं. 167) को दिखाया गया था, वह अपीलकर्ता के दादा के नाम पर दर्ज था, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। दादा के तीन पुत्र होने के कारण वह जमीन तीन हिस्सों में बंट चुकी थी।

See also  Court News: प्रतियोगी परीक्षा गड़बड़ी के मामलों के लिए रांची में विशेष अदालत गठित, पूरे झारखंड के केस की होगी सुनवाई

नियमों के तहत पेट्रोल पंप के लिए न्यूनतम 400 वर्ग मीटर (20m x 20m) क्षेत्रफल की आवश्यकता थी, जबकि अपीलकर्ता के हिस्से में केवल 6.33 डिसमिल (लगभग 256 वर्ग मीटर) जमीन ही आ रही थी, जो कि विज्ञापन में तय मानकों से काफी कम थी। इस आधार पर 29 फरवरी 2020 को IOCL ने उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया था। एकल पीठ से राहत न मिलने पर उन्होंने खंडपीठ में अपील दायर की थी।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
CourtNews Desk

CourtNews Desk

Bringing you the latest news and in-depth analysis from around the world.

Leave a Comment