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Rape Case: हाई कोर्ट ने कहा- प्यार का मतलब यह नहीं है कि महिला शारीरिक संबंध के लिए राजी

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 22 Nov, 2021
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Thiruvananthapuram: Rape Case केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड के रिलेशनशिप (Girlfriend-Boyfriend Relationship) पर कहा है कि प्यार होने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि महिला ने संबंध बनाने की सहमति दे दी है। जस्टिस आर नारायण पिशारदी ने अपने फैसले में कहा कि मजबूरी और लाचारी को किसी की सहमति नहीं कहा जा सकता है। सहमति और सबमिशन के बीच एक बड़ा अंतर है। सहमति में सबमिशन (Submission) शामिल होता है लेकिन बातचीत का पालन नहीं होता है।

केरल हाई कोर्ट ने 26 साल के श्याम सिवान की अपील पर सुनवाई की। ट्रायल कोर्ट ने श्याम को रेप के एक मामले में दोषी ठहराया था, जिसके बाद उसने केरल हाई कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोषी श्याम और पीड़िता एक-दूसरे से प्यार करते थे। साल 2013 में श्याम पीड़ित लड़की को कर्नाटक के मैसूर ले गया था। वहां उसने जबरन पीड़िता के साथ संबंध बनाए थे।

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श्याम ने पीड़िता के सारे गहने भी बेच दिए। इसके बाद वो पीड़िता को गोवा ले गया जहां उसने फिर से युवती से रेप किया। श्याम ने पीड़िता को धमकी दी थी कि अगर वो उसके साथ नहीं चलेगी तो वो उसके घर के सामने आत्महत्या कर लेगा। कोर्ट ने आगे कहा कि भले ही कुछ मौकों पर पीड़िता ने श्याम का विरोध नहीं किया लेकिन इसे संबंध बनाने के लिए सहमति नहीं माना जा सकता है। वो एक तरह से पैसिव सबमिशन था क्योंकि पीड़िता के पास कोई विकल्प नहीं था।

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हालांकि केरल हाई कोर्ट ने POCSO के तहत निचली अदालत की तरफ से दी गई सजा को खारिज कर दिया है क्योंकि वारदात के समय की पीड़िता की उम्र का पता नहीं लग पाया था। लेकिन जस्टिस पिशारदी ने अपने आदेश में कहा कि श्याम दोषी है और उसको आईपीसी की धारा 366 और 376 (अपहरण और बलात्कार) के तहत सजा मिलेगी।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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