अदालत ने स्पष्ट किया—’सिक्योरिटी चेक’ के नाम पर एन.आई. एक्ट की देनदारी से नहीं बचा जा सकता; नोटिस मिलने के बाद मुकर नहीं सकते।
Ranchi News: रांची के अपर न्यायायुक्त-XII की अदालत ने चेक बाउंस (Negotiable Instruments Act) से जुड़े एक बड़े और सनसनीखेज मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अपीलकर्ता प्रमोद कुमार सिन्हा की क्रिमिनल अपील को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई एक साल की साधारण कैद और 1.10 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मुआवजे व जुर्माने के आदेश को पूरी तरह से बरकरार रखा है। इन तमाम कानूनी पहलुओं और साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद अदालत ने अपील को खारिज कर दिया और अपीलकर्ता को सजा भुगतने के लिए निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
क्या था पूरा मामला और विवाद?
शिकायतकर्ता कंपनी मैसर्स सरोजिनी बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (निदेशक कृष्णा मुरारी सिंह) ने निचली अदालत में शिकायत वाद 2018 में दर्ज कराया था। आरोप था कि कंपनी ने जमीन खरीदने के लिए प्रमोटर/आरोपी प्रमोद कुमार सिन्हा को कुल 3,24,73,700/- रुपये दिए थे (खाता नं- 157, प्लॉट नं- 845, क्षेत्रफल 25 कट्ठा)। हालांकि, बाद में जब कंपनी को पता चला कि उक्त जमीन पहले ही बेची जा चुकी है, तो उसने पैसे वापस मांगे। पैसे के भुगतान के एवज में आरोपी ने इंडसइंड बैंक (रातु रोड शाखा, रांची) का 76 लाख रुपये का एक पोस्ट-डेटा चेक (संख्या- 554517, दिनांक 05.10.2018) दिया था। बैंक में प्रस्तुत करने पर यह चेक ‘अपर्याप्त राशि’ (Insufficient Funds) के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने और समयावधि बीतने के बाद भी भुगतान न होने पर एन.आई. एक्ट की धारा 138 के तहत मुकदमा चलाया गया था।

