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नाबालिग को एसिड पिलाने के मामले में हजारीबाग एसपी व जांच अधिकारी को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 21 Aug, 2020
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रांची। हजारीबाग के ईचाक में नाबालिग स्कूली छात्रा को एसिड पिलाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने एसपी व जांच अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अब तक जांच से पता चल रहा है कि आरोपी को बचाया जा रहा है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने हजारीबाग एसपी पूछा कि क्या पीड़िता का बयान आरोपी की गिरफ्तारी के पर्याप्त नहीं है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ पोस्को एक्ट, आइपीसी की धारा 307 लगी है, इस सब धाराओं में उसे अधिकतम सजा उम्र कैद की सजा भी हो सकती है। अदालत ने कहा कि किस प्रवधान के तहत आरोपी को पॉलिग्राफी टेस्ट के लिए सहमति ली गई है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट की जानकारी अदालत ने एसपी से मांगी है। मामले में अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मामले में अनुसंधान की दिशा सही हो, वरना सीबीआइ जांच का भी आदेश दिया जा सकता है। अदालत ने एसपी से पूछा कि मामले में इतनी देर से पीड़िता का सीआरपीसी की धारा 164 का बयान क्यों दर्ज कराया गया। सुनवाई के दौरान वीसी के जरिए हजारीबाग एसपी और अनुसंधानकर्ता उपस्थित थे।

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सुनवाई के दौरान एसपी ने अदालत को बताया कि इस मामले में आरोपी को पकड़ने के लिए दो बार उसके घर छापेमारी की गई, लेकिन वह घर पर नहीं मिला। इसके बाद उसी मांग ने एसपी कार्यालय में एक आवेदन देकर कहा कि उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है और वह दिहाड़ी मजदूरी करता है। इस पर अदालत ने कहा कि जब आरोपी जब फरार है, तो पुलिस ने कुर्की जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं की। जांच से पता चल रहा है कि इस मामले में पुलिस जांच की बजाय स्वयं ही ट्रायल कर रही है। अदालत ने कहा कि ट्रायल का काम कोर्ट का है।

अदालत ने कहा कि शपथ पत्र में कहा गया है कि आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है और वह फरार है। वहीं दूसरी ओर कह रहे हैं कि उसने पॉलिग्राफी टेस्ट के लिए सहमति दे दी है। इसका मतलब है कि आरोपी पुलिस के संपर्क में है। इस पर एसपी कहा कि आरोपी की पोलिग्राफी टेस्ट के कोर्ट से अनुमति मिल गयी है। इस पर अदालत ने पूछा कि किस प्रावधान के तहत आरोपी को बिना गिरफ्तार किए ही उससे पोलिग्राफी टेस्ट अनुमित ली गई है। अदालत ने एसपी से निचली अदालत का रिकार्ड मांगाते हुए पूछा है कि क्या आरोपी ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। अदालत ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट के साथ हजारीबाग एसपी और अनुसंधानकर्ता को अगली सुनवाई में भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

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बता दें कि दिसंबर 2019 में एक नाबालिग स्कूली छात्रा को कुछ लोगों ने एसिड पिला दिया। इसका जगहों पर इलाज चला और करीब दो माह तक वह कुछ बोल नहीं पाई। अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद झारखंड हाई कोर्ट की अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख। जिसपर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई कर रही है।   

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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