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फर्जी जाति प्रमाण पत्र में फंसे गिरिडीह मेयर सुनील पासवान को हाईकोर्ट से मिली राहत

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 31 Aug, 2020
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रांची। झारखंड के गिरिडीह नगर निगम के मेयर सुनील कुमार पासवाल को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में फंसे सुनील कुमार पासवाल को अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान की है। इस मामले में गिरिडीह सीओ ने तीन मार्च को इनके खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी। निचली अदालत ने मेयर सुनील पासवान की अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इन्होंने अग्रिम जमानत देने की गुहार लगाई थी।


सुनवाई के दौरान मेयर सुनील कुमार पासवान के अधिवक्ता विनोद सिंह ने अदालत को बताया कि गिरिडीह उपायुक्त की अनुशंसा पर राज्य जाति छानबीन समिति ने दिसंबर 2019 में मेयर सुनील पासवान की जाति प्रमाण पत्र को रद कर दिया। समिति ने अपने आदेश में कहा कि सुनील कुमार पासवान बिहार के रहने वाले हैं। इसलिए झारखंड में जातिगत आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते हैं। इसके बाद हाईकोर्ट की वृहत पीठ ने भी बिहार के लोगों को प्रदेश में जातिगत आरक्षण नहीं देने का फैसला दिया। इसी आधार पर गिरिडीह सीओ ने मेयर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है।

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विनोद सिंह ने कहा कि सिर्फ मेयर के चुनाव के समय ही सुनील पासवान को जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है, बल्कि इससे पहले 2005, 2010 और 2015 में उन्हें जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया गया था। इसलिए उनकी जाति प्रमाण पत्र को फर्जी नहीं कहा जा सकता है। वहीं, सुप्रमी कोर्ट के आदेशानुसार राज्य जाति छानबीन समिति के आदेश को तब तक अमल में नहीं लाया जा सकता है, जब तक हाईकोर्ट इसे कन्फर्म न कर दे। राज्य जाति स्क्रूटनी कमेटी के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, जो कि लंबित है। सुनवाई के बाद अदालत ने मेयर सुनील पासवान को अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान कर दी।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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