processApi - method not exist
Home high court news दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- बच्चियों के यौन शोषण के मामलों में मुआवजा...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- बच्चियों के यौन शोषण के मामलों में मुआवजा देने की जिम्मेदारी का पालन करें ट्रायल कोर्ट

Compensation In Rape Case दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चियों के यौन शोषण व अन्य दुष्कर्म मामलों में पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मुआवजा न देने संबंधी ट्रायल कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताई है।

New Delhi: Compensation In Rape Case दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चियों के यौन शोषण व अन्य दुष्कर्म मामलों में पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मुआवजा न देने संबंधी ट्रायल कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की कई पीड़ित मुआवजा स्कीम है लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा। अदालत ने सभी अदालत को हर परिस्थितियों में विचार कर उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया है। 

अदालत दुष्कर्म के दो मामलों में संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने एक मामला में पीड़ित बच्ची व उसके परिवार का पता लगाकर उन्हें मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि परिवार का पता नहीं चल पा रहा।

जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने एक महिला से दुष्कर्म मामले में आरोपी रणजीत नायक की अपील को खारिज करते हुए पाया कि संबंधित अदालत ने पीड़िता को मुआवजा प्रदान करने के लिए आदेश नहीं दिया। आरोपी को अदालत ने 10 वर्ष कैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

इसे भी पढ़ेंः कैदियों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट का नालसा से अनुरोध, देशव्यापी एसओपी जारी करने पर करे विचार

जस्टिस ओहरी ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय व नालसा द्वारा तय दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट की हर ऐसे मामले में डयूटी है कि वह तय स्कीम के तहत पीड़िता व उसके परिवार के पुनर्वास के लिए उचित मुआवजा प्रदान करे। इस मामले में तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि ट्रायल कोर्ट अपनी डयूटी में फेल रही है। उन्होंने यौन शोषण मामलों में दिल्ली पीड़िता मुआवजा स्कीम 2018 के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए।

अदालत ने दिल्ली राज्य लीगल सर्विस अथारिटी को चार सप्ताह में उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साढ़े तीन वर्षीय बच्ची के यौन शोषण मामले में आरोपी राकेश उर्फ दीवान की अपील खारिज करते हुए उसे मिली आजीवन कारावास की सजा को बहाल रखा है। अदालत ने इस मामले में भी पाया कि बच्ची व उसके परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला।

अदालत ने पाया कि पुलिस ने तर्क रखा कि बच्ची व उसका परिवार किसी अन्य स्थान पर चला गया है ऐसे में मुआवजा नहीं दिया जा सका।उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए डीएलएसए की जिम्मेदारी है कि तय नियमों का पालन करते हुए पीड़ित को मुआवजा प्रदान करे।

RELATED ARTICLES

ANM Exam: हाई कोर्ट ने कहा- सभी छात्रों को 18 मई तक जारी करें एडमिट कार्ड

ANM Exam: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में एएनएम और जीएनएम की परीक्षा का एडमिट कार्ड रद किए...

CM Lease case: हाई कोर्ट ने पूछा- रांची डीसी को खनन विभाग के व्यक्तिगत जानकारी कैसे

CM Lease case: झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन...

IAS Pooja Singhal case: ईडी ने कोर्ट से कहा- बड़े अधिकरियों और सत्ता के लोगों की भूमिका संदिग्ध

IAS Pooja Singhal case: खूंटी में वर्ष 2010 में हुए मनरेगा घोटाले की करोड़ों की राशि तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल को मिली...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

ANM Exam: हाई कोर्ट ने कहा- सभी छात्रों को 18 मई तक जारी करें एडमिट कार्ड

ANM Exam: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में एएनएम और जीएनएम की परीक्षा का एडमिट कार्ड रद किए...

CM Lease case: हाई कोर्ट ने पूछा- रांची डीसी को खनन विभाग के व्यक्तिगत जानकारी कैसे

CM Lease case: झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन...

IAS Pooja Singhal case: ईडी ने कोर्ट से कहा- बड़े अधिकरियों और सत्ता के लोगों की भूमिका संदिग्ध

IAS Pooja Singhal case: खूंटी में वर्ष 2010 में हुए मनरेगा घोटाले की करोड़ों की राशि तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल को मिली...

JSSC News: प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के लिए आवेदन की तिथि बढ़ी, अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

JSSC News: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के...