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Assistant Professor Appointment: जवाब नहीं दाखिल करने पर हाईकोर्ट ने छह विश्वविद्यालयों पर दस-दस हजार का लगाया हर्जाना

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 23 Dec, 2021
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Ranchi: Assistant Professor Appointment झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश के बाद भी जवाब दाखिल नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे लिए जिम्मेदार राज्य के छह विश्वविद्यालयों को दस-दस हजार रुपये हर्जाना जमा करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत सहायक प्रोफेसर नियुक्ति को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई कर रही है।

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर राज्य के सभी सात विश्वविद्यालयों को अपना-अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। लेकिन विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अलावा किसी ने भी अपना जवाब कोर्ट में दाखिल नहीं किया। जिसके बाद अदालत ने सभी पर दस-दस हजार रुपये हर्जाना लगाया है। उक्त राशि हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन वेलफेयर फंड में जमा करना है।

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अदालत ने जिन पर हर्जना लगाया है। उसमें रांची विश्वविद्यालय, डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय और सिदो-कान्हू विश्वविद्यालय शामिल है। हालांकि जेपीएससी और राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया था।

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इसको लेकर डॉ तसलीम आरिफ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि जेपीएससी की ओर से सहायक प्रोफेसर नियुक्ति के लिए वर्ष 2018 में विज्ञापन जारी किया था। लेकिन वर्ष 2017 में सरकार की ओर से नियुक्ति नियमावली में किए गए संशोधन को इसमें शामिल कर लिया गया।

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लेकिन इस प्रकार की नियुक्ति विश्वविद्यालय स्टैच्यूट के अनुसार ही की जाती और इसके लिए राज्य सरकार नियमावली नहीं बना सकती है। यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। ऐसा करने के लिए विश्वविद्यालय को ही अधिकार है। याचिका में यह भी कहा गया है कि मात्र कोल्हान विश्वविद्यालय ने इस संबंध में नियमावली बनाई थी।

लेकिन राज्य सरकार ने इसे सभी विश्वविद्यालयों में लागू कर दिया है, जो न्यायसंगत नहीं है। इस मामले में सरकार की ओर से दाखिल जवाब के पर अदालत ने सभी विश्वविद्यालयों को जवाब देने का निर्देश दिया था। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल, प्रिंस कुमार सिंह व राकेश रंजन ने पक्ष रखा।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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