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6th JPSC: कैडर चयन में आरक्षण का लाभ नहीं मिलने के मामले में जेपीएससी और सरकार से मांगा जवाब

रांची। झारखंड हाईकोर्ट छठी जेपीएससी के सफल अभ्यर्थियों को कैडर चयन में आरक्षण का लाभ नहीं मिलने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत सुनवाई के बाद इस मामले में जेपीएससी और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी संजय कुमार महतो की ओर से बताया गया कि वे अति पिछड़ा जाति (ईबीसी-वन) की कैटगरी से आते हैं। उनका चयन सामान्य कैटगरी में किया गया है। इस कारण उन्हें कैडर चयन में आरक्षण का लाभ नहीं मिला है। इसके चलते उन्हें प्रशासनिक सेवा की बजाय योजना सेवा का कैडर मिला है।

प्रार्थी कुमार अविनाश की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें सामान्य कैटेगरी में सफल घोषित किया गया है, जबकि वे शिड्यूल कास्ट से आते हैं। जिसकी वजह से उन्हें वित्त सेवा का कैडर मिला है। इस दौरान उनकी ओर से कहा गया कि चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाना चाहते हैं। इस पर जेपीएससी के अधिवक्ता संजय पिपरवाल व प्रिंस कुमार सिंह की ओर से अदालत को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार सिर्फ कुछ सफल अभ्यर्थियों को प्रतिवादी नहीं बनाया जा सकता है। इसके लिए इन्हें सभी सफल अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाना होगा। जहां तक इन दोनों अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में चयनित किए जाने का सवाल है, तो इनके कुल प्राप्तांक सामान्य कैटेगरी के कट ऑफ मार्क्स से ज्यादा था, इसलिए इनका चयन सामान्य कैटेगरी में किया गया है। अदालत को यह भी बताया गया कि जेपीएससी के कई कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण हुआ है। इस मामले में अगली सुनवाई दस सितंबर को होगी।

अंतिम परिणाम को चुनौती देने वाले मामले में भी मांगा जवाब

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में छठी जेपीएससी के अंतिम परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने प्रार्थी के आइए पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस संबंध में प्रदीप राम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि जेपीएससी ने अंतिम परिणाम जारी करने में क्वालिफाइंग पेपर के भी प्राप्तांक को जोड़ दिया है, जो कि गलत है। वहीं, प्रार्थी की ओर से आइए दाखिल कर कुछ सफर अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने की बात कही गई है। इसपर अदालत ने जेपीएससी से जवाब मांगा है।

इसे भी पढ़ेंः रिश्वत लेने के दोषी को मिला संदेह का लाभ, हाईकोर्ट ने किया बरी

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