Supreme Court News

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- व्यक्तिगत स्वतंत्रता संवैधानिक जनादेश का महत्वपूर्ण पहलू, आत्मसम्मान को नुकसान पहुंचाती है गिरफ्तारी

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 21 Aug, 2021
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Stay on arrest of Abhishek Jha, husband of suspended IAS Pooja Singhal, accused of money laundering
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महज इसलिए किसी को गिरफ्तार करना कि यह कानूनी रूप से वैध है, इसका यह मतलब नहीं है कि गिरफ्तारी की ही जाए। साथ ही उसने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संवैधानिक जनादेश का एक महत्वपूर्ण पहलू है। अदालत ने कहा कि अगर नियमित तौर पर गिरफ्तारी की जाती है तो यह किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा एवं आत्मसम्मान को बेहिसाब नुकसान पहुंचा सकती है।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि अगर किसी मामले के जांच अधिकारी को यह नहीं लगता कि आरोपी फरार हो जाएगा या सम्मन की अवज्ञा करेगा तो उसे हिरासत में अदालत के समक्ष पेश करने की आवश्यकता नहीं है।

See also  Reservation in promotion: केंद्र व राज्य सरकारों की बहस पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि निजी आजादी हमारे संवैधानिक जनादेश का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जांच के दौरान किसी आरोपी को गिरफ्तार करने की नौबत तब आती है जब हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो जाए या यह कोई जघन्य अपराध हो या ऐसी आशंका हो कि गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है या आरोपी फरार हो सकता है।

इसे भी पढ़ेंः पटना हाईकोर्ट ने निरस्‍त किया BPSC का फैसला, कहा- सिर्फ मूल डिग्री नहीं दे पाने पर नौकरी की उम्मीदवारी रद नहीं की जा सकती

अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने एक मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इस मामले में सात साल पहले प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

See also  SC News: अपने ही सरकारी वकील से कानूनी जंग हार गई झारखंड सरकार, देना होगा सेवानिवृत्ति लाभ

पीठ ने कहा कि महज इसलिए किसी को गिरफ्तार करना कि यह कानूनी रूप से वैध है, इसका यह मतलब नहीं है कि गिरफ्तारी की ही जाए। अगर नियमित तौर पर गिरफ्तारी की जाती है तो यह किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा एवं आत्मसम्मान को बेहिसाब नुकसान पहुंचा सकती है।

उच्च न्यायालय का आदेश रद्द करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाने से पहले जांच में शामिल हुआ था और मामले में आरोपपत्र भी तैयार था। उसने कहा कि अगर जांच अधिकारी को यह नहीं लगता कि आरोपी फरार हो जाएगा या सम्मन की अवज्ञा करेगा जबकि उसने जांच में सहयोग किया तो हमें यह समझ नहीं आता कि आरोपी को गिरफ्तार क्यों किया जाए।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

2,377 articles published
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment