Supreme Court News

जल्द ही तय होगी वकील के लिए बहस की समय सीमा, सुप्रीम कोर्ट बनाएगा नियम

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 01 Aug, 2021
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
supreme court of india
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

New Delhi: लंबित मामलों के बोझ तले दबा सुप्रीम कोर्ट अब जल्द-जल्द मामलों को निपटाने के मूड में आ गया है। शीर्ष अदालत के कई जजों ने अब वकीलों को लिखित दस्तावेज संक्षिप्त में देने और बहस से लिए समय निर्धारित करने की कवायद शुरू कर दी है। जल्द ही इसके लिए नियम बनाया जा सकता है। हाल के दिनों ने कई न्यायाधीशों ने वकीलों को दलीलों का संक्षिप्त सार, बहस से पूर्व देने के लिए कहना शुरू कर दिया है।

पिछले दिनों जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट में ही ऐसा होता है जहां वकीलों घंटों और दिनों तक बहस करते हैं और एक के बाद एक सैकड़ों पन्नों का दस्तावेज पेश करते रहते हैं। पीठ ने कहा कि इससे न्यायालय का बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है। जस्टिस कौल ने कहा कि अब समय आ गया है जब वकीलों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

पीठ ने कहा कि मोटे दस्तावेज और घटों तक बहस चलने से उन अपीलों के साथ हम कैसे न्याय कर पाएंगे जो 10 वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं। पीठ ने यह कहते हुए गुजरात के वकील यतीन ओझा के मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और अरविंद दातार को अपनी बहस पूरी करने के लिए 30-30 मिनट का समय दिया। ओझा की वरिष्ठ वकील की पदवी छीन ली गई है।

See also  हाईकोर्ट ने कहा- ये कैसा कल्याणकारी राज्य, जहां सालभर काम के बदले मात्र तीन माह का वेतन दिया जाता है

इसे भी पढ़ेंः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- बहुल नागरिकों के धर्म परिवर्तन से देश होता है कमजोर

मामले में दोनों पीठ की इस बात से सहमत भी दिखे। सुप्रीम कोर्ट के दूसरे जज भी वकीलों को संक्षिप्त बहस और चार-पांच पन्नों का लिखित सार प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ भी वकीलों को न केवल बहस को बल्कि लिखित दस्तावेजों को संक्षिप्त पेश करने का आग्रह कर रहे हैं।

पिछले दिनों एक मामले में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने कहा कि जब हम वकीलों को संक्षेप में लिखित सार रखने के लिए कहते हैं तो अक्षरों का आकार छोटा हो जाता है। कभी-कभी यह दवा के पत्तों पर लिखे अक्षर जैसा हो जाता है, जिन्हें पढ़ना संभव नहीं। जस्टिस माहेश्वरी फोंट साइज छोटा होने के लेकर आपत्ति जता चुके हैं।

See also  Ranchi: यूट्यूबर अमित कुमार महतो को नहीं मिली जमानत, याचिका खारिज

ऐसा नहीं है कि वकीलों को ही समय की दुहाई दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट खुद भी अपने फैसलों को स्पष्ट और छोटा लिखने का प्रयास कर रहा जा। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्य एक पीठ ने अपने फैसले में यह कहा है कि जजों को प्रयास करना चाहिए कि फैसले स्पष्ट और छोटे हो जिससे कि आम आदमी उसे समझ सके।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, दो जुलाई 2021 तक सुप्रीम कोर्ट में 69,212 मुकदमे लंबित है। इनमें से 442 मामले संविधान पीठ के समक्ष लंबित हैं। कई बार अदालत के भीतर और बाहर मांग उठती रही है कि सुप्रीम कोर्ट को सांविधानिक कोर्ट ही रहने दिया जाए।

वहां सिर्फ सांविधानिक मसलों पर भी सुनवाई की जाए, जबकि अन्य मामलों की सुनवाई सर्किट ब्रांच में की जाए। हालांकि, अब तक इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। दुनिया के कई देशों के सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की बहस की समयसीमा तय है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की बहस के लिए 25 मिनट का वक्त तय है। इसी तय समय सीमा के अंदर उन्हें अपनी सारी बातें रखनी होती है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment