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जजों की सुरक्षाः केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा राष्ट्रीय फोर्स का गठन व्यवहारिक नहीं, राज्य ही बनाएं ऐसी संस्था

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 17 Aug, 2021
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New Delhi: केंद्र ने जजों की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय फोर्स का गठन की मांग को अव्यवहारिक बताया है। केंद्र ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस तरह की विशिष्ट फोर्स का गठन राज्यों को अपने स्तर पर करना चाहिए। यह बात केंद्र ने देश भर के निचली अदालत के जजों की सुरक्षा के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान कही है। झारखंड में एक जज की संदिग्ध मौत पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने यह सुनवाई शुरू की है।

कोर्ट ने इस मसले पर केंद्र और सभी राज्यों से जवाब मांगा था। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने आज कहा कि हम राज्यों को यह निर्देश नहीं देना चाहते कि उन्हें क्या करना चाहिए। केंद्र सरकार राज्यों से बात करे। इस पर केंद्र के लिए पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जजों की सुरक्षा को लेकर राज्यों को एक मॉडल दिशानिर्देश जारी किया गया है।

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इस पर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ गाइडलाइंस जारी करना समाधान नहीं हो सकता। केंद्र को हर राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से पता करना चाहिए कि इसका कितना पालन हो रहा है। सॉलिसीटर जनरल ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि वह केंद्रीय गृह सचिव को इस मसले पर सभी राज्यों के मुख्य सचिव और डीजीपी की बैठक बुलाने की सलाह देंगे।

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इसके बाद बेंच ने कहा कि एक याचिका में जजों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल या रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स की तरह की राष्ट्रीय संस्था बनाने की मांग की गई है। इसे लेकर केंद्र के क्या विचार हैं? तुषार मेहता ने जवाब दिया कि यह व्यवहारिक मांग नहीं है। पुलिस और कानून-व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं। राज्य के स्तर की कोई संस्था ही वहां पुलिस से बेहतर तालमेल बना कर काम कर सकेगी।

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कोर्ट ने मामले में जवाब दाखिल न करने वाले राज्यों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाने की चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि 10 दिन बाद होने वाली सुनवाई से पहले जिस राज्य ने जवाब दाखिल नहीं किया, उसके मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।

अदालत ने कहा कि असम को छोड़कर किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कई राज्यों ने तो अब तक जवाब ही दाखिल नहीं किया है। ज़्यादातर राज्यों ने कोर्ट में सीसीटीवी लगाने जैसी बातें बताई हैं। सीसीटीवी से क्या होगा? क्या हमला रुक जाएगा? कोर्ट ने राज्यों से बेहतर हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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