रांची। नियुक्ति में आरक्षण देने के एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने इस मामले में प्रतिवादी गिरिवर मिंज को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही सरकार को गिरिवर मिंज को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है।

इसको लेकर राज्य सरकार और जेपीएससी ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ खंडपीठ में याचिका दाखिल की है। दरअसल, वर्ष 2010 में सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए जेपीएससी ने डिप्टी कलेक्टर सीमित परीक्षा का विज्ञापन निकाला था। इसमें शर्त थी कि आरक्षण का लाभ उन्हीं को दिया जाएगा, जो झारखंड के सक्षम पदाधिकारी से जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र जमा करेंगे।

इसमें बिहार के रहने वाले अखिलेश प्रसाद व मनोज कुमार ने भी आवेदन दिया था। लेकिन अखिलेश प्रसाद का आवेदन रद कर दिया गया। क्योंकि उन्होंने जाति प्रमाण पत्र नहीं दिया। वहीं, मनोज कुमार जाति प्रमाण पत्र दिया था। लेकिन जेपीएससी की अनुशंसा पर सरकार को आरक्षण का लाभ देने के मना कर दिया और कहा कि इन्हें नियुक्ति में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है बल्कि प्रोन्नति में इसका लाभ मिल सकता है।

इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान कहा गया कि संयुक्त बिहार में इनकी नियुक्ति हुई थी। झारखंड राज्य के गठन के बाद वे झारखंड कैडर में काम कर रहे है। ऐसे में आरक्षण लाभ के लिए जाति प्रमाण पत्र जमा करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके आरक्षण का मामला कैडर के साथ कैरी कर रहा है। इसके बाद एकलपीठ ने उन्हें आरक्षण का लाभ देने का आदेश दिया।

इसके बाद जेपीएससी और राज्य सरकार ने खंडपीठ में याचिका दाखिल कर एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। लेकिन खंडपीठ ने रोक से इन्कार कर दिया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, वहां भी सरकार को राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए वापस कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई कर रही है।