Supreme Court News

आरक्षण मामलाः सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कोटा का मतलब योग्यता को नकारना नहीं

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 21 Dec, 2020
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Stay on arrest of Abhishek Jha, husband of suspended IAS Pooja Singhal, accused of money laundering
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

सुप्रीम कोर्ट (Suprme Court) ने जातिगत आरक्षण (Reservation) के मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कोटा नीति का मतलब योग्यता को नकारना नहीं है। इसका मकसद मेधावी उम्मीदवारों को नौकरी के अवसरों से वंचित रखना नहीं है, भले ही वे आरक्षित श्रेणी से ताल्लुक रखते हों। 

जस्टिस उदय ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरक्षण के लाभ को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पद भरने के लिए आवेदकों की जाति की बजाय उनकी योग्यता पर ध्यान देना चाहिए और मेधावी उम्मीदवारों की मदद करनी चाहिए। कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में आवेदकों का चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर होना चाहिए। 

See also  रांचीः दिव्यांगों को समान अवसर प्रदान करना सरकार व समाज की जिम्मेदारी : झालसा सचिव, कुमारी रंजना अस्थाना

आरक्षण, ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज, दोनों ही तरीकों से सरकारी सेवा में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का तरीका है। आरक्षण को सामान्य श्रेणी के योग्य उम्मीदवार के लिए मौके खत्म करने वाले नियम की तरह नहीं देखना चाहिए। यह बात सुप्रीम कोर्ट की अलग पीठ के न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट ने फैसले में टिप्पणी के तौर पर लिखी। 

इसे भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में कॉमेडियन कुणाल व रचिता तनेजा को जारी किया कारण बताओ नोटिस

जस्टिस भट ने कहा कि ऐसा करने से नतीजा जातिगत आरक्षण के रूप में सामने आएगा, जहां प्रत्येक सामाजिक श्रेणी आरक्षण के अपने दायरे में सीमित हो जाएगी और योग्यता नकार दी जाएगी। सभी के लिए ओपन कैटिगरी होनी चाहिए। इसमें सिर्फ एक ही शर्त हो कि आवेदक को अपनी योग्यता दिखाने का मौका मिले, चाहे उसके पास किसी भी तरह के आरक्षण का लाभ उपलब्ध हो।

See also  Arvind Kejriwal की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केजरीवाल को जेल से लेकर कोर्ट के लिए निकली CBI

गौरतलब है कि कई उच्च न्यायालय ने अपने फैसलों में माना है कि आरक्षित वर्ग से संबंधित कोई उम्मीदवार अगर योग्य है तो सामान्य वर्ग में भी आवेदन कर सकता है। चाहे वह अनुसूचित वर्ग, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग का हो। ऐसे में वह आरक्षित सीट को दूसरे उम्मीदवार के लिए छोड़ सकता है।

हालांकि, विशेष वर्गों जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार, पूर्व सैनिक या एससी/एसटी/ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित सीटें खाली रहती हैं। उन पर सामान्य वर्ग के आवेदकों को मौका नहीं दिया जाता। सरकार के इस सिद्धांत और व्याख्या को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

2,377 articles published
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment