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नाबालिग को जिंदा जलाने पर हाईकोर्ट का कड़ा रूख, कहा हाथरस जैसी घटना सिर्फ यूपी में नहीं, बल्कि झारखंड में भी हो रही

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 08 Oct, 2020
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रांची। गिरिडीह में एक 15 साल नाबालिग को जिंदा जला कर मारने के आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने राज्य के डीजीपी को शीध्र ही एसआईटी का गठन कर मामले की जांच कराने का आदेश दिया है। इस दौरान अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि हाथरस जैसी घटनाएं सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि झारखंड में भी हो रही है। अदालत ने एसआईटी जांच की डीजीपी को मॉनिटरिंग करने का भी आदेश दिया है।

अदालत ने कहा है कि इस मामले में अब तक जांच करने वाली टीम पर डीजीपी कार्रवाई करने के लिए स्वंतंत्र हैं। क्योंकि यह एक गंभीर मामला है। पुलिस को इसकी जांच गंभीरता से करनी चाहिए, लेकिन अभी तक की जांच से पता चल रहा है कि पुलिस इस केस की जांच में सिर्फ लापरवाही बरत रही है। इस संबंध में पीड़िता के पिता शंकर पासवान ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि 30 मार्च 2020 को यह घटना हुई है। इस मामले में पिंटू पासवान को नामजद आरोपी बनाया गया है, लेकिन पुलिस अभी तक पिंटू पासवान को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। पुलिस जांच में लापरवाही बरत रही है। इसलिए इसी एसआईटी जांच कराने का आग्रह प्रार्थी ने किया है।

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पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने गिरिडीह के एसपी को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया था। गुरुवार को एसपी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में हाजिर हुए। एसपी ने अदालत को बताया इस केस का सुपरविजन करने वाले अधिकारी ने प्राथमिकी में दर्ज बातों को सही नहीं बताया था और ऑनर किलिंग की आशंका जाहिर की है।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर जताते हुए पूछा कि क्या किसी मामले के नामजद आरोपी को सुपरविजन रिपोर्ट के बाद ही पुलिस गिरफ्तार करती है। यदि मामला ऑनर किलिंग का भी है, तो इस मामले में अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस ने इस मामले में पीड़िता के स्वाब को भेजने में देरी की है। यह पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। अदालत ने कहा कि युवती के साथ दुष्कर्म हुआ या नहीं इसकी जांच के लिए स्वाब 20 दिनों बाद क्यों भेजा गया। पुलिस किस प्रकार की जांच कर रही है। अब तक की जांच से लग रहा है कि पुलिस इस मामले में पूरी तरह से लापरवाही बरत रही है। इसलिए अदालत ने डीजीपी को जांच टीम के खिलाफ कार्रवाई करने की छूट प्रदान की है।

30 मार्च को गिरिडीह के ईटासानी गांव में पिंटू पासवान नामक युवक ने एक 15 वर्षीय नाबालिग को जिंदा जलाकर मार डाला था। इसके बाद से आरोपी फरार है। घटना के पीछे प्रेम प्रसंग की बात भी बतायी जा रही थी। घटना के दिन पीड़िता के कमरे से आरोपी की टोपी और चप्पल भी बरामद किए गए थे। घटना के बाद पीड़िता के पिता शंकर पासवान ने पिंटू पर बेटी को जिंदा जलाकर मारने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी। इसमें कहा गया है कि उनका पूरा परिवार पूजा के लिए बाहर गए थे। उनकी नाबालिग बेटी अकेले घर में थी। जब सभी लोग घर लौटे तो शंकर घर से निकल रहा था। उससे पूछताछ हुई तो बहाना बना कर निकल गया। कमरे में जाने पर जला शव मिला था। 

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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