संवेदक को टर्मिनेट करने पर हाईकोर्ट नाराज, कहा- काम पूरा होने में सरकार डाल रही अडंगा

झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में रांची सदर अस्पताल (Gov Hospital) में 500 बेड चालू नहीं किए जाने के खिलाफ दाखिल अवमानना मामले में सुनवाई हुई।

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में रांची सदर अस्पताल (Gov Hospital) में 500 बेड चालू नहीं किए जाने के खिलाफ दाखिल अवमानना मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि भवन निर्माण विभाग की ओर से काम करने वाली संवेदक को टर्मिनेट करने का नोटिस जारी किया गया है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की कार्रवाई सदर अस्पताल के काम में अडंगा लगाने जैसा है। क्योंकि जब संवेदक को टर्मिनेट कर दिया जाएगा, तो क्या सरकार के पास इसे पूरा करने का कोई प्लान है।नसुनवाई के दौरान अदालत ने भवन सचिव को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जब इस मामले की हाई कोर्ट निगरानी कर रहा है, तो संवेदक को टर्मिनेट करने का नोटिस कैसे दिया गया।

इस मामले में राज्य सरकार के खिलाफ ही अवमानना का मामला चल रहा है। अदालत ने कहा कि अगर सराकर को ऐसा कदम उठाना था, तो वह दिसंबर 2018 में संवेदक के खिलाफ एक्शन लेती। क्योंकि राज्य सरकार ने कोर्ट में इस बात का आश्वासन दिया था कि दिसंबर 2018 में रांची सदर अस्पताल में सारी सुविधाओं के साथ 500 बेड चालू कर दिया जाएगा।

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अदालत ने इस मामले में संवेदक से हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। सुनवाई के दौरान संवेदक की ओर से अदालत को बताया गया कि अब तक 85 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। 31 सितंबर तक सदर अस्पताल के सभी काम पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन इस बीच सरकार ने उन्हें टर्मिनेशन का नोटिस जारी किया है।

इस पर अदालत ने भवन निर्माण सचिव को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में हाजिर होने का आदेश देते हुए कुछ देर के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। कुछ देर बाद भवन निर्माण विभगा के सचिव अदालत में हाजिर हुए। अदालत ने सचिव से पूछा कि जब संवेदक को टर्मिनेट करने का नोटिस दिया है, तो क्या सरकार के पास कोई ऐसा प्लान है, जो सितंबर के अंत तक सारा काम पूरा हो जाएगा।

अदालत ने कहा कि जब कोर्ट के समक्ष मामले आने के बाद इसका काम पूरा कराने की कोशिश कर रही, तो इस बीच टर्मिनेट करने का नोटिस देकर सरकार काम में अडंगा क्यों लगा रही है। अदालत ने कहा कि बाकी बचे काम को पूरा करने के लिए संवेदक ने कोर्ट में अंडरटेकिंग दिया है, तो अगर उस समय तक काम पूरा नहीं होता है, तो कोर्ट संवेदक के खिलाफ कार्रवाई करती।

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