रांची। झारखंड हाईकोर्ट में रेगुलर कोर्ट सुनवाई पर अधिवक्ताओं में उत्साह नजर नहीं आ रहा है। हाईकोर्ट की ओर इस मामले में मांगे गए मंतव्य का आंकड़ा दहाई तक भी नहीं पहुंचा है। कुछ अधिवक्ताओं ने रेगुलर कोर्ट में सुनवाई की बात कही है, लेकिन विपक्षी पार्टी की ओर से सहमति नहीं ली गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता रेगुलर कोर्ट में सुनवाई को लेकर उत्साहित नहीं है।

इसको लेकर पिछले दिनों हाईकोर्ट के एडवोकेट एसोसिएशन की ओर से चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कहा गया था कि हाईकोर्ट में रेगुलर कोर्ट की शुरुआत की जाए। इसके पीछे कई वजह भी गिनाई गई थी। इसको देखते हुए हाईकोर्ट ने दो नवंबर से दाखिल होने वाली नई याचिका व लंबित मामलों में पूछा था कि वे रेगुलर कोर्ट में सुनवाई चाहते हैं या नहीं। इसमें पक्ष व विपक्ष की सहमति के बाद कोर्ट को इसकी जानकारी भेजनी थी।

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हाईकोर्ट की माने तो इसको लेकर अभी तक कोई खास आवेदन नहीं आए हैं। कुछ लोगों ने रेगुलर कोर्ट में सुनवाई की बात कही है, लेकिन विपक्षी पार्टी से सहमित नहीं होने की वजह से रेगुलर कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकती है। इस मामले में हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते अभी भी अधिवक्ता रेगुलर कोर्ट शुरू करने पर सहमति नहीं दे रहे हैं।

एसोसिएशन का मानना है कि रेगुलर कोर्ट शुरू होने से आर्थिक संकट का सामना करने वाले अधिवक्ताओं को थोड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि एसोसिएशन ने अपने पत्र में भी इसका जिक्र किया था। फिलहाल अधिवक्ताओं में रेगुलर कोर्ट शुरू करने में उत्साह नहीं दिखाने से लगता है कि इस साल हाईकोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई ही होगी।