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Honor killing: उप्र के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आजादी के 75 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ जातिवाद

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 29 Nov, 2021
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New Delhi: Honor killing जाति से जुड़ी हिंसा की घटनाओं के जारी रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कहा है कि आजादी के 75 साल बीतने के बावजूद समाज में जाति के नाम पर हिंसा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में 1991 में हुई आनर किलिंग की घटना पर फैसला सुनाते हुए की। घटना में में दो युवा पुरुषों और एक महिला को करीब 12 घंटे तक पीटा गया। इस पिटाई से उनकी मौत हो गई।

यह घटना जातीय विद्वेष की भावना के चलते हुई। कोर्ट ने प्रशासन को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के भी निर्देश दिए। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, मामलों की सुनवाई सुचारु ढंग से चले और सत्य सामने आए, इसके लिए गवाहों की सुरक्षा जरूरी है। जब आरोपी पक्ष के साथ राजनीतिक लोग, बाहुबली और अमीर लोग हों तब गवाहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

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पीठ ने यह बात मामले में अभियोजन पक्ष के 12 गवाहों के पक्षद्रोही होने के चलते कही है। पीठ ने कहा, जातीय कट्टरता वाली गतिविधियां आज तक जारी हैं, जबकि संविधान सभी नागरिकों को बराबरी की दृष्टि से देखता है। पीठ ने समाज से जाति प्रथा खत्म करने के लिए भारत रत्न डा. भीमराव आंबेडकर के सुझाव को अमल में लाने का भी सुझाव दिया। कहा कि अंतरजातीय विवाहों को बढ़ावा देकर जातिविहीन समाज की स्थापना की जा सकती है।

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पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई भी शामिल थे। मामले में ट्रायल कोर्ट ने नवंबर 2011 में दिए आदेश में 35 आरोपितों को दोषी ठहराकर उनके लिए सजा का एलान किया था, जबकि हाई कोर्ट ने इनमें से दो को बरी करते हुए बाकी की सजा को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने आठ दोषियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था। जिन आठ लोगों को मौत की सजा से राहत दी गई थी, उन्हें आखिरी सांस तक जेल में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने तीन लोगों को पहचान स्पष्ट न हो पाने के चलते बरी कर दिया है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट की बाकी मुजरिमों को दी गई सजा बरकरार रखी है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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