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सालाना सौ करोड़ मिलने के बाद भी रिम्स बदहाल, प्रबंधन जिम्मेदारः हाईकोर्ट

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 18 Sep, 2020
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स में आधे से ज्यादा पद खाली होने पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सक्षम लोग तो कहीं भी इलाज करा सकते हैं, लेकिन आम लोगों को लिए तो रिम्स ही सहारा है। बदहाल स्थिति के लिए रिम्स प्रबंधन जिम्मेदार है। सालाना 100 करोड़ का फंड मिलने के बाद भी यहां आधारभूत संरचना तैयार नहीं की जा सकी है। चिकित्सक से लेकर पारा मेडिकल कर्मियों के आधे पद खाली हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कैसे किया जा रहा है। यह बहुत ही दुखद एवं आश्चर्य की बात है कि कोरोना मरीजों का सीटी स्कैन के लिए सिर्फ एक घंटे का समय निर्धारित है और एक ही मशीन भी उपलब्ध है। स्वतः संज्ञान से दर्ज मामले की चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सुनवाई हुई।

अदालत ने कहा कि कोरोना संकट के शुरूआती दिनों में ही अदालत ने कोरोना संकट से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में चिकित्सक व कर्मी होने की बात सरकार से पूछी थी। इस पर सरकार ने चिकित्सक सहित मेडिकल कर्मियों की पर्याप्त संख्या होने की बात कही थी। लेकिन सरकार का जवाब देखने के बाद पता चल रहा है कि रिम्स में आधे से ज्यादा पद रिक्त है। इसी कारण से हाईकोर्ट कर्मियों के सैंपल लेने के सात से 10 दिनों के बाद रिपोर्ट मिल रही है। ऐसे में तो संक्रमण बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पेईंग वार्ड में आक्सीजन पाइप लगा दी गई है, लेकिन उसका प्रोसेसिंग यूनिट नहीं लगा है। जरूरत पड़ने पर आक्सीजन का सिलिंडर लगाया जाता है। इन सुविधाओं के लिए रिम्स को सालाना सौ करोड़ रुपये मिलते हैं। इस फंड का क्या होता है? क्यों नहीं रिम्स को मिलने वाले पिछले दस साल के फंड की ऑडिट कराई जाए। अदालत ने कहा कि पूर्व की सुनवाई के दौरान जब सरकार ने रिक्त पदों को भरने की बात कही थी, इसके बावजूद रिक्तियों को भरने की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं ?

अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि रिम्स में काफी सुधार की आवश्यकता है। मौजूदा स्थिति में रिम्स पर ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था निर्भर करती है, इसलिए न्यायालय का पूरा ध्यान रिम्स की व्यवस्था सुधारने पर केंद्रित है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई एक अक्तूबर को निर्धारित करते हुए स्वास्थ्य सचिव और रिम्स के प्रभारी निदेशक को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्वास्थ्य सचिव और रिम्स के प्रभारी निदेशक पूछा है कि रिक्त पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इन पदों को नियुक्ति कब हो जाएगी। सभी आधारभूत संरचनाएं कब तक बहाल हो जाएंगी। अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्टेड और अन्य उपकरणों के सुसज्जित कितने बेड है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि स्थायी निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। इसके लिए 26 आवेदन आए थे। इनमें पांच रद कर दिए गए हैं। इसके लिए 23 सितंबर को साक्षात्कार निर्धारित है।
सरकार की ओर से बताया गया कि रिम्स में डॉक्टरों के 322 पद स्वीकृत हैं। इनमें 85 रिक्त हैं। नर्सों के 846 स्वीकृत पदों में 469 खाली हैं और 183 पारा मेडिकलकर्मियों के पद स्वीकृत हैं और इनमें 75 पद खाली हैं।

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सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि रिम्स की हालात बदहाल है। इसी सक्षम लोग वहां इलाज के लिए नहीं जा रहे हैं, लेकिन आम लोगों को तो रिम्स में इलाज कराना है। अदालत ने कहा कोरोना मरीजों की चादर 17 दिनों तक नहीं बदली जा रही है। इसकी शिकायत उन्हें मिली है। इन शिकायतों पर रिम्स के निदेशक से जवाब मांगा गया है। हालांकि इसे अभी जनहित याचिका में तब्दील नहीं किया गया है। शिकायतों से लगता है कि वीआईपी के लिए रिम्स में सभी इंतजाम तो कर दिए जाते हैं, लेकिन आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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