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पीएमसीएच के तत्कालीन अधीक्षक डॉ शरतचंद्र दास को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

रांची। पीएमसीएच, धनबाद के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. शरतचंद्र दास को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। इन पर सीटी स्कैन मशीन सहित अन्य उपकरण की खरीदारी में घोटाला करने का आरोप है। इस मामले में एसीबी ने वर्ष 2016 में प्राथमिकी दर्ज की थी। फिलहाल चिकित्सक के खिलाफ निचली अदालत ने वारंट जारी किया है।

सुनवाई के दौरान एसीबी के अधिवक्ता टीएन वर्मा ने अदालत को बताया कि शरतचंद्र दास करीब एक साल तक पीएमसीएच के अधीक्षक पद पर कार्यरत थे। इस दौरान सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए सीटी स्कैन सहित अन्य उपकरणों की खरीदारी में घोटाले की बात सामने आने के बाद इसकी जांच एसीबी को सौंपी गई। एसीबी की जांच में पाया गया कि इन्होंने चिकित्सकीय उपकरणों की खरीदारी में अपने पद का दुरुपयोग किया है।

बिना टेंडर की सही प्रक्रिया का पालन किए ही खरीदरी की गई, जबकि वे उस दौरान क्रय समिति के चेयरमैन भी थी। सीटी स्कैन मशीन की आपूर्ति से पहले ही कंपनी को 1.63 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान कर दिया गया। सीटी स्कैन मशीन जापान से लाई गई थी। उक्त कंपनी को जापानी करेंसी में भुगतान किया, जो नियमानुसार सही नहीं है।

सुनवाई के दौरान शरतचंद्र दास के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस मामले के सामने आने के बाद इन पर विभागीय कार्रवाई की गई, जिसमें इन्हें क्लीनचिट मिली है। वहीं, इस मामले में एसीबी ने वर्ष 2016 में प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें बहुत देर हुई है। इसलिए प्राथमिकी को रद कर देना चाहिए। अदालत ने पूछा कि वर्तमान समय में केस की क्या स्थिति है। इस पर अदालत को बताया गया कि आरोपी चिकित्सक के खिलाफ निचली अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। लेकिन आरोपी फरार है। इसके बाद अदालत ने डॉ. शरत चंद्र दास की याचिका को खारिज कर दिया।

इसे भी पढ़ेंः पूर्व मंत्री हरिनारायण राय की अपील पर बहस पूरी, हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

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