भूख से मौतः हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- राज्य में अब तक कितने लोगों की भूख से हुई मौत

164
high court of jharkhand

रांचीः झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने झारखंड में भूख से हुई मौत का रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि राज्य में अब तक कितने लोगों की भूख से मौत हुई है। ऐसा न हो इसके लिए सरकार कौन-कौन सी योजना चला रही है।

बोकारो के कसमार के एक ही परिवार के तीन लोगों भूख से मौत की रिपोर्ट अखबारों में प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। खबरों के अनुसार बोकारो जिले के कसमार प्रखंड शंकरडीह गांव निवासी भूखल घासी की छह मार्च को भूख से मौत हो गई थी। छह महीने बाद ही उनके बेटे और बेटी की भी मौत हो गई।

ग्रामीणों का कहना था कि परिवार में खाने को कुछ नहीं था इस कारण तीनों की मौत हुई है। इस मामले में अदालत को बताया गया कि किसी की भी मौत भूख से नहीं हुई थी। भूखल घासी की मौत के बाद प्रशासन की टीम उसके घर गयी थी। घर में पर्याप्त अनाज था। छह माह बाद उसकी बेटी राखी की मौत पर सरकार का कहना था कि राखी की तबीयत खराब थी।

इसे भी पढ़ेंः अवैध निर्माणः बिना नक्शे के बन जाता है मकान, हाईकोर्ट ने पूछा- आरएमसी का जांच तंत्र क्या करता है

परिजनों के अनुसार उसका इलाज सदर अस्पताल में कराया गया, जहां मलेरिया और खून की कमी बताया गया। राखी अस्पताल से घर लौटने के बाद उसकी मौत हुई। इससे स्पष्ट है कि उसकी मौत भूख से नहीं बल्कि खून की कमी से हुई। परिवार के एक अन्य सदस्य की मौत भी बीमारी से हुई।

इस पर कोर्ट ने कहा कि झालसा ने लोगों की भूख से मौत न हो इसके लिए तृप्ति योजना लांच की है। तो क्या झालसा ने यह योजना बिना किसी ग्राउंड रिपोर्ट के तैयार की है। अदालत ने झालसा के सचिव को भी इस मामले में प्रतिवादी बनाया और उन्हें जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया कि किस आधार पर यह योजना तैयार की गयी है।

अदालत ने सरकार को पूरे मामले पर रिपोर्ट देने के साथ यह बताने को कहा कि राज्य में अभी तक किसी की भूख से मौत हुई है या नहीं। सरकार को यह भी बताना होगा कि रिपोर्ट तैयार करने का आधार क्या है। मामले में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।