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7th JPSC Exam: जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में चार उत्तर गलत होने का दावा, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

Ranchi: 7th JPSC Exam झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की ओर से ली गई परीक्षा हमेशा विवाद में ही रहती है। ताजा विवाद अब सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उत्पन्न हो गया है। उमेश कुमार वर्मा की ओर से तीन प्रश्नों का उत्तर गलत व एक प्रश्न गलत बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

उक्त याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता चंचल जैन ने बताया कि प्रारंभिक परीक्षा होने के बाद जेपीएससी ने अपनी वेबसाइट पर मॉडल उत्तर जारी किया था और अभ्यर्थियों से इस पर आपत्ति मांगी थी। आपत्ति आने के बाद जेपीएससी ने संशोधित मॉडल उत्तर जारी किया। जिसमें तीन प्रश्न का उत्तर गलत और एक प्रश्न ही गलत है।

जिससे प्रार्थी प्रभावित हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि जनरल स्टडी पेपर वन के सी-सीरीज में प्रश्न संख्या 29, 57 और 87 का उत्तर गलत है। वहीं, जनरल स्टडी पेपर दो के सी-सीरीज की प्रश्न संख्या 28 ही गलत है। ऐसे में जेपीएससी की ओर से जारी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को निरस्त किया जाए।

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शराब की नई नीति पर सुनवाई टली
सरकार की ओर से थोक शराब बिक्री के लिए बनाई गई नई नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई टल गई है। यह मामला चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन अदालत दूसरी पाली में नहीं बैठी। इस वजह से सुनवाई टल गई।

इस मामले में प्रार्थी की ओर से बहस पूरी कर ली गई है अब राज्य सरकार की ओर से बहस की जानी है। पूर्व की सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि झारखंड उत्पाद अधिनियम-1915 की धारा 20-22 और 38 के अनुसार लाइसेंस निर्गत करने के लिए सक्षम पदाधिकारी कलेक्टर होते हैं।

लेकिन नई नियमावली में उक्त अधिकार उत्पाद आयुक्त को दे दिया गया है। अधिनियम की धारा-90 के अनुसार लाइसेंस निर्गत करने के लिए शर्तों का निर्धारण अथवा नियम बनाने का अधिकार बोर्ड आफ रेवन्यू को दिया गया है, लेकिन सरकार ने ही सभी नियम बना दिए हैं। ऐसे में नई नियमावली अवैध एवं गैरकानूनी है इसलिए अदालत इस मामले में उचित निर्णय पारित करे।

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