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सीसीटीवी फुटेज से खुला राज: गैंगेस्टर जितेंद्र गोगी से पहले अदालत में पेश हुआ था टिल्लू गैंग का साथी, मौका मिलते दाग दी गोलियां

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 25 Sep, 2021
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सीसीटीवी फुटेज से खुला राज: गैंगेस्टर जितेंद्र गोगी से पहले अदालत में पेश हुआ था टिल्लू गैंग का साथी, मौका मिलते दाग दी गोलियां
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New Delhi: Delhi Rohini Court Shootout दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में शुक्रवार दोपहर ताबड़तोड़ गोलियां चली। कोर्ट रूम में जज के सामने दो हमलावरों ने पेशी के लिए आए गैंगस्टर जितेन्द्र मान उर्फ गोगी की गोलियां मारकर हत्या कर दी। गोगी को पेशी के लिए लाए स्पेशल सेल के कमांडो ने दोनों हमलावरों को कोर्ट रूम में ही मार गिराया। बताया जा रहा है कि कोर्ट रूप में दोनों तरफ से 30 से 35 गोलियां चलीं थीं।

दोनों हमलावर वकील की पोशाक में आए थे और सुबह ही कोर्ट रूम में जाकर बैठ गए थे। जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज में इस बात की पुष्टि हो गई है। वहीं सूत्रों का कहना है कि जितेंद्र के विरोधी टिल्लू गैंग के बदमाश को भी शुक्रवार को उससे पहले कोर्ट में पेश किया गया था। आशंका है कि अपने गैंग के बदमाश के साथ ही हमलावर वकील के ड्रेस में कोर्ट रूम में पहुंचे और इंतजार के बाद जितेंद्र को गोली मार दी।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि जितेंद्र की कोर्ट रूम में करीब सवा एक बजे पेश किया गया। इससे पहले 12.30 बजे टिल्लू गैंग के एक बदमाश को कोर्ट में पेश किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि हमला करने वाले दोनों बदमाश अपने साथी के साथ ही कोर्ट में आए होंगे। रोहिणी कोर्ट के वकीलों के मुताबिक इस तरह के गैंगस्टर को जब कोर्ट में पेश किया जाता है उससे पहले छोटे मामलों की सुनवाई की जाती है। उसके बाद गैंगस्टर को पेश किया जाता है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि हमलावर पहले से ही हमला करने की साजिश रच रहे थे और इसके लिए कोर्ट की रैकी भी की होगी। जांच के दौरान पुलिस कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को कब्जे में कर लिया है और इस बात की जांच में जुट गई है। पुलिस करीब एक सप्ताह के फुटेज को खंगाल रही है। साथ ही इस बात की भी आशंका है कि हमला करने वाले दोनों बदमाशों के अलावे टिल्लू गैंग के अन्य बदमाश भी कोर्ट में पहुंचे होंगे। जिनकी पहचान की जा रही है।

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जाने गोगी कैसे बना अपराध की दुनिया का कुख्यात
दिल्ली के अलीपुर के नवल पार्क गांव जितेन्द्र मान उर्फ गोगी सिर्फ 30 वर्ष की उम्र में ही अपराध की दुनिया में कुख्यात हो गया था। ताबड़तोड़ गैंगवार को अंजाम देने व दिलवाने वाला जितेंद्र गोगी खुद गैंगवार में मारा गया। उसकी टिल्लू ताजपुरिया से गैंगवार चल रही थी। गोगी और टिल्लू गैंग के बीच अबतक कई बार गैंगवार हो चुका है जिसमें 12 से ज्यादा अपराधी मारे जा चुके हैं।

जितेंद्र गोगी तीन बार पुलिस कस्टडी से फरार हुआ था। गिरफ्तारी से पहले वह दिल्ली-हरियाणा पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द था। गोगी 30 जुलाई 2016 की सुबह बहादुरगढ़ में दिल्ली पुलिस की कस्टडी से फरार हो गया था। तब हरियाणा रोडवेज की बस से नरवाना कोर्ट में पेशी पर ले जाते वक्त बहादुरगढ़ में दो कारों में सवार 10 बदमाशों ने बस को ओवरटेक कर रुकवा लिया था।

पहले से ही बस में बैठे कुछ बदमाशों ने पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च झोंक दी और फायर करते हुए गोगी को छुड़ाकर ले गए थे। गोगी व उसके साथी पुलिसवालों के असलहा भी लूट ले गए थे। इसके बाद गोगी अपने गुर्गों के साथ दिल्ली और हरियाणा में ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को चुनौती देने लगा।

मोस्ट वांटेड की सूची में टॉप पर रह चुका गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ गोगी तिहाड़ जेल से दुबई के कारोबारी से 5 करोड़ की रंगदारी मांगने की वजह से भी सुर्खियों में था। दुबई का कारोबारी लॉकडाउन में जब रोहिणी स्थित अपने घर पर आया तो उसने रंगदारी मांगी गई थी। बदमाशों ने फायरिंग कर जितेन्द्र गोली के नाम पर रंगदारी मांगी थी।  वह जेल से ही रंगदारी, फिरौती के लिए अगवा करने और सुपारी लेकर मर्डर करने का काला कारोबार जारी रखा था।

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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
दिल्ली कोर्ट में हुई गोलीबारी में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वो भी तब जब दिल्ली की सुरक्षा हाई अलर्ट पर है। कुछ दिनों पहले ही एक आतंकी गुट के छह आतंकियों को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया गया था। बताया गया था कि ये आतंकी त्योहारों के सीजन में सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाने वाले हैं। पुलिस ने आतंकियों के अन्य मॉड्यूल के होने की संभावना को लेकर हाई अलर्ट जारी किया था।

हाई अलर्ट के बीच एक अदालत में गोलीबारी होना सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी पर गंभीर सवाल उठ रहा है। रोहिणी जिला अदालत के एक कर्मचारी के अनुसार अदालतों की सुरक्षा पर वकीलों की दबंगई भारी पड़ी है। अदालतों के वकील अदालत परिसर में प्रवेश के समय होने वाली चेकिंग को अपनी शान के विरूद्ध समझते हैं। चेकिंग करने वाले कर्मचारियों से अकसर उनकी बहस हो जाती है।

यही कारण है कि सुरक्षा कर्मचारी भी वकीलों को ठीक से चेक करने से बचते हैं। वकीलों की यही दबंगई अदालत की सुरक्षा पर भारी पड़ी और तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। रोहिणी कोर्ट में इसके पहले 2015 में भी इसी तरह का एक हमला किया गया था। उस मामले में भी हमलावर ने जज के सामने अपने दुश्मन को गोली मार दी थी। उस समय भी रोहिणी की अदालत की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे।

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वकीलों और पुलिस में हुई थी मारपीट
अदालत परिसर में वकील अपने सामने पुलिस के जवानों की सुरक्षा संबंधी सलाह भी नहीं सुनते। इसको लेकर कई बार वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हो चुका है। इसके पहले राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट और कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में इसी तरह के मुद्दे पर वकीलों और पुलिसकर्मियों में टकराव हो चुका है। अंत में उच्चस्तरीय पुलिस अधिकारियों के बीच-बचाव के बाद दोनों पक्षों के बीच मामला शांत कराया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में होती है सबकी चेकिंग
सुप्रीम कोर्ट के परिसर में प्रवेश करने से पहले हर वकील की चेकिंग होती है। सभी को सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना अनिवार्य है। वकीलों के पास आने वाले लोगों को भी वकील के द्वारा पास बनाकर दिए जाने के बाद पास की जांच करने के बाद ही लोगों को अदालत परिसर में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में सुरक्षा में चूक होने की कोई संभावना नहीं बचती।

रोहिणी कोर्ट के वकीलों ने इसे कमजोर सुरक्षा का परिणाम बताया है। कहा जा रहा है कि अदालत परिसर में प्रवेश करने वाले द्वार पर लगा मेटल डिटेक्टर काम नहीं कर रहा था, जिससे वकीलों के वेश में छिपे हमलावर हथियार लेकर अदालत तक पहुंचने में सफल रहे। जिला अदालतों के वकीलों ने शनिवार को काम के बहिष्कार का एलान किया है।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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