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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या पीड़िता से करोगे शादी

सुप्रीम कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की से रेप के आरोपी से पूछा कि क्या वह पीड़िता से शादी करने को तैयार है? महाराष्ट्र के एक सरकारी अधिकारी की स्पेशल लीव पीटिशन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी से पीड़िता से शादी को लेकर इच्छा पूछी।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की से रेप के आरोपी से पूछा कि क्या वह पीड़िता से शादी करने को तैयार है? महाराष्ट्र के एक सरकारी अधिकारी की स्पेशल लीव पीटिशन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी से पीड़िता से शादी को लेकर इच्छा पूछी।

आरोपी अधिकारी ने बॉम्बे हाई कोर्ट (औरंगाबाद बेंच) के उस फैसले तो चुनौती दी है जिसमें अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। मामले की सुनवाई को दौरान चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े ने आरोपी याचिकाकर्ता से पूछा, ‘क्या तुम उससे शादी करोगे? ।

इसपर याचिककर्ता के वकील ने कहा कि उसे इसके लिए पूछना होगा। याचिकाकर्ता के मोहित चवन वकील ने कहा कि उनका क्लायंट सरकारी अधिकारी है और अगर गिरफ्तारी होती है तो उन्हें नौकरी से सस्पेंड कर दिया जाएगा। इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘नाबालिग को बहलाने और उसका रेप करने से पहले यह सोचना चाहिए था।’

23 साल के सुभाष चवण पर साल 2014-15 में एक 16 साल की लड़की से रेप का आरोप है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी साफ किया कि वह याचिकाकर्ता पर शादी के लिए दबाव नहीं डाल रहा है।

रेप आरोपी से कोर्ट ने पूछा कि क्या तुम शादी करना चाहते हो। हम तुम्हे दबाव नही डाल रहे। दरअसल आरोपी ने वादा किया था कि लड़की बालिग हो जाएगी तो शादी कर लेगा, पर किया नही और केस दर्ज हुआ था।

इसे भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लीव-इन-रिलेशनशिप में रहने वालों के बीच बने शारीरिक संबंध को क्या दुष्कर्म माना जाए

मामले में आरोपी को सेशन कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली थी, लेकिन हाई कोर्ट से जमानत नही मिली, तब मामला सुप्रीम कोर्ट आया था। कोर्ट ने कहा कि अगर वह शादी करना चाहता है तो इसकी जानकारी दे।

बाद में याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि शादी करना करना संभव नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता पहले से शादीशुदा है। वकील ने कोर्ट से यह भी कहा कि पहले याचिकाकर्ता लड़की से शादी करना चाहता था, लेकिन उसने इंकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता एक नियमित बेंच में जाने के लिए स्वतंत्र है। सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में सीजेआई बोबड़े के अलावा जस्टिस ए एस बोपन्ना, वी रामासुब्रमण्यन भी शामिल थे।

बेंच ने याचिकाकर्ता को 4 हफ्ते तक गिरफ्तारी से राहत भी दी है। दरअसल, 2019 में आरोपी के खिलाफ नाबालिग से रेप का मामला आईपीसी की धारा 376, 417, 506 और पॉक्सो ऐक्ट की धारा 2 और 4 के तहते केस दर्ज किया गया था।

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