high court news

HC News: पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को राहत, सेवा से हटाने और मानदेय रोकने का आदेश रद्द

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 25 Sep, 2026
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
High court news
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

अदालत ने जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को किया खारिज; अप्रैल 2025 से सभी बकाये मानदेय का भुगतान करने का दिया सख्त निर्देश।

मुख्य बातें (Key Highlights):

  • मुकदमा/याचिका: मेरी मुर्मू एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य।

  • न्यायालय: झारखंड उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत)।

  • अदालत का निर्णय: कोर्ट ने शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की वैधता पर विवाद के आधार पर पारा शिक्षकों को हटाने और मानदेय रोकने के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।

Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने पूर्वी सिंहभूम जिले के पारा शिक्षकों को एक बड़ी राहत प्रदान करते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसके तहत उनके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को सही न मानते हुए उन्हें सेवा से हटाने और मानदेय रोकने की कार्रवाई की गई थी। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रभावित पारा शिक्षकों को अप्रैल 2025 से लेकर अब तक का सारा बकाया मानदेय अविलंब भुगतान किया जाए। इस संबंध में मेरी मुर्मू और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

See also  HC News: सहायक निदेशक व एपीपी नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार

क्या था पूरा मामला और विवाद?

यह पूरा मामला पारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यताओं और उनके द्वारा प्राप्त प्रमाण पत्रों से जुड़ा हुआ है। दरअसल, इलाहाबाद और देवघर के कुछ ऐसे संस्थानों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने वाले पारा शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता पर सवाल उठाए गए थे, जिन्हें गैर-मान्यता प्राप्त माना गया था। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित संस्थान शामिल थे:

  • इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद

  • हिंदी महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद

  • हिंदी विद्यापीठ, देवघर

इन संस्थानों के प्रमाण पत्रों के आधार पर कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले पारा शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने 7 नवंबर 2025 को एक पत्र जारी किया था। इस पत्र के आधार पर राज्य के विभिन्न जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE) ने संबंधित ब्लॉक एक्सटेंशन अधिकारियों, टाउन रिसोर्स सेंटरों और स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

See also  कथित फर्जी मुठभेड़ में सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट की गिरफ्तारी पर लगी रोक

जिला शिक्षा अधीक्षक का आदेश और हाईकोर्ट में चुनौती:

इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक ने जिले के संबंधित पारा शिक्षकों को काम से हटाने और उनका मानदेय रोकने का आदेश जारी कर दिया था। इस कार्रवाई से प्रभावित होकर पारा शिक्षकों ने झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में जिला शिक्षा अधीक्षक के इस एकतरफा आदेश को पूरी तरह से गैरकानूनी बताते हुए रद्द करने और रोका गया मानदेय मय बकाये के भुगतान करने का आग्रह किया गया था।

अदालत का रुख और राहत:

मामلे के सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि इस प्रकार अचानक बिना पुख्ता और न्यायसंगत आधार के सेवा समाप्त करना और मानदेय रोकना उचित नहीं है। इसके साथ ही, अदालत ने जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को निरस्त करते हुए अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का आदेश जारी कर दिया है, जिससे पूर्वी सिंहभूम के सैकड़ों पारा शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।

CourtNews Desk

1,849 articles published
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
CourtNews Desk

CourtNews Desk

Bringing you the latest news and in-depth analysis from around the world.

Leave a Comment