Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) के पटमदा थाना क्षेत्र में वर्ष 2013 में महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया है। जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने चारों दोषियों—हेमंतो सिंह उर्फ हेमंत सिंह उर्फ हातो सिंह, रामनाथ सिंह उर्फ मुंडा सिंह, विभीषण सिंह उर्फ पंचू सिंह और फागू हांसदा उर्फ सुफल हांसदा—की 20-20 साल की सश्रम कारावास (RI) और 40-40 हजार रुपये जुर्माने की सजा को यथावत रखा है।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 नवंबर 2013 की दोपहर लगभग 3:00 बजे पीड़िता (विधवा महिला) अपने ससुराल से मायके जा रही थी। लपित छेंचा जंगल में नज़दीक पहुंचते ही आरोपियों ने उसे जबरन पकड़ लिया और जंगल के पास एक नाले में ले जाकर बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता द्वारा शोर मचाने और किसी की आहट सुनने पर आरोपी जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। घटना के बाद गांव में पंचायती बुलाने के प्रयास में देरी के कारण 8 नवंबर 2013 को पटमदा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां:
सुनवाई के दौरान दोषियों के वकीलों ने चिकित्सकीय साक्ष्यों और एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी का तर्क देकर बरी करने की गुहार लगाई। हालांकि, अदालत ने पीड़िता (पी.डब्ल्यू.4) के बयान को विश्वसनीय माना और मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर एवं पीठ पर चोटों के निशानों (मार्क्स ऑफ वायलेंस) को महत्वपूर्ण संपुष्टि साक्ष्य माना। अदालत ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में पहले पंचायती के प्रयास के कारण एफआईआर में हुई देरी स्वाभाविक है और पीड़िता के साक्ष्य में कोई संदेह नहीं है।

