Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के 10 साल पुराने चर्चित कल्लु घोष हत्याकांड में निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए चार दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने दोषियों द्वारा दायर आपराधिक अपीलों को खारिज कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि और घटना का ब्योरा:
घटना की तारीख और स्थान: यह घटना 18 मई 2016 की सुबह करीब 6:45 बजे बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित धातकीडीह हरिजन बस्ती में हुई थी।
हत्या का तरीका: मृतक कल्लु घोष अपने घर के पास पीपल के पेड़ के चबूतरे पर योग कर रहे थे। इसी दौरान पुराने विवाद और रंजिश के कारण आरोपी—होलिया मुखी, खून मुखी उर्फ विकास, टीका मुखी उर्फ गोपी और ज्योति मुखी—हथियारों (पिस्तौल) से लैस होकर पहुंचे और कल्लु घोष पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी।
इलाज के दौरान मौत: गोली लगने से गंभीर रूप से घायल कल्लु घोष को टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान दोपहर 2:30 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
पुरानी रंजिश: इससे पहले 26 सितंबर 2015 को भी आरोपियों ने कल्लु घोष पर तलवार से हमला किया था, जिसको लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी और मामला अदालत में लंबित था। उसी रंजिश का बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया गया।
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और आधार:
प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही: उच्च न्यायालय ने पाया कि चश्मदीद गवाहों (मृतक के भाई मुन्ना घोष, पत्नी जूली घोष और भतीजों) के बयानों में पूर्ण निरंतरता है और उन्होंने घटना तथा आरोपियों की भूमिका का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है।
मेडिकल रिपोर्ट से पुष्टि: पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की रिपोर्ट और मौके से मिले कारतूसों की जब्ती सूची ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की पुष्टि की।
सजा बरकरार: हाईकोर्ट ने माना कि सभी अभियुक्तों ने गैर-कानूनी जमाव (Unlawful Assembly) बनाकर साझा उद्देश्य (Common Object) के तहत इस घटना को अंजाम दिया था। इस आधार पर निचली अदालत (अपर सत्र न्यायाधीश-V, जमशेदपुर) द्वारा भादवि की धारा 148, 302/149 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत सुनाई गई आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।

