Supreme Court News

SC News: IAS पूजा सिंघल को SC लगा बड़ा झटका, मनी लांड्रिंग मामले में ED कोर्ट में जारी रहेगा ट्रायल, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 25 Sep, 2026
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
IAS Pooja Singhal
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Delhi/Ranchi: झारखंड की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रहे मामले में निचली अदालत द्वारा अपराध का संज्ञान लेने वाले आदेश को फिलहाल रद्द करने से इनकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अभियोजन मंजूरी का मुद्दा कानून और तथ्यों से जुड़ा मिश्रित प्रश्न है, जिस पर ट्रायल के उचित चरण में अन्य साक्ष्यों के साथ फैसला किया जाएगा। इस आदेश के साथ पूजा सिंघल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई जारी रहेगी। 

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?

मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि विशेष अदालत वर्ष 2022 में ही मामले का संज्ञान ले चुकी थी और कार्यवाही काफी पहले शुरू हो चुकी है।

वहीं, पूजा सिंघल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अभियोजन मंजूरी नहीं ली गई थी।

See also  Land Scam: जमीन कब्जे में हेमंत सोरेन की भागीदारी का संकेत नहीं, जमानत देने में हानि नहीं; HC का आदेश पढ़ें

मंजूरी को लेकर क्या है विवाद?

पूजा सिंघल की ओर से कहा गया कि जब अभियोजन मंजूरी का सवाल उठाया गया, तब ED ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के उस प्रावधान का हवाला दिया, जिसमें कुछ परिस्थितियों में मंजूरी को “स्वतः स्वीकृत” माना जा सकता है। बचाव पक्ष का तर्क था कि सिंघल भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी नहीं हैं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप उनके आधिकारिक कार्यों से जुड़े हैं। इसलिए धारा 197 के तहत पूर्व अनुमति जरूरी थी।

अदालत ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने यह भी उल्लेख किया कि पूजा सिंघल से जुड़े मामले में 19 करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद हुई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर अभियोजन मंजूरी के सवाल पर अंतिम टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि यह देखना जरूरी होगा कि कथित अपराध के समय अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रही थीं या नहीं। पीठ ने कहा कि मंजूरी के मुद्दे को खुला रखा जाएगा, ताकि ट्रायल के उचित चरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस पर फैसला किया जा सके। अदालतों की एक दिलचस्प आदत है, वे हर सवाल का जवाब उसी समय नहीं देतीं. कुछ जवाब सबूतों के पकने का इंतजार करते हैं.l।

See also  Ranchi/H Court: शिक्षक नियुक्ति मामले में एकलपीठ के आदेश को सरकार और जेपीएससी खंडपीठ में देगी चुनौती
2022 में हुई थी गिरफ्तारी

ED ने झारखंड में मनरेगा के कार्यान्वयन में कथित 18 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के दौरान मई 2022 में पूजा सिंघल से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। 11 मई 2022 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में दो वर्ष से अधिक समय जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली और इसके बाद उनका निलंबन भी समाप्त कर दिया गया।

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत

पूजा सिंघल ने रांची स्थित पीएमएलए विशेष अदालत के 19 जुलाई 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें ईसीआईआर संख्या 3/2018 में अपराध का संज्ञान लिया गया था।

उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में दलील दी थी कि पीएमएलए की धारा 3 और 4 के तहत अपराध का संज्ञान CrPC की धारा 197 के तहत आवश्यक मंजूरी के बिना लिया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि निजी गैरकानूनी कृत्यों से जुड़े मामलों में धारा 197 के तहत अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं होती।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment