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SC-ST Case: थाना प्रभारी को जातिसूचक शब्द कहने के मामले में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव बरी

Ranchi: SC-ST Case रांची सिविल कोर्ट से पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को बड़ी राहत मिली है। अपर न्यायायुक्त (सप्तम) विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने एससी-एसटी उत्पीड़न से जुड़े दो मामलों में साक्ष्य के अभाव में योगेंद्र साव को बरी कर दिया है। इस मामले में योगेंद्र साव को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जेल से अदालत में पेश किया गया था।

इससे पहले उनके अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा ने अदालत को बताया कि इस मामले में समन के बाद भी न तो जांच पदाधिकारी और न ही अन्य गवाह कोर्ट के समक्ष गवाही के उपस्थित हो रहे हैं। अभियोजन की ओर से इस मामले में कोई खास रूचि नहीं ली जा रही है। ऐसे में बिना समय बर्बाद करते हुए अब तक हुई गवाही को समाप्त किया जाए और मामले में फैसला सुनाया जाए।

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इसके बाद अदालत ने पूर्व में बहस पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने इस मामले में गवाहों के बयान से मुकरने और साक्ष्य अभाव में योगेंद्र साव को बरी करने का आदेश दिया। वर्ष 2018 में बड़कागांव के तत्कालीन थाना प्रभारी परमानंद मेहरा ने योगेंद्र साव की जेसीबी और हाइवा जब्त कर लिया था।

इसको छोड़ने के लिए योगेंद्र साव ने थाना प्रभारी को फोन किया था। आरोप था कि उन्होंने थाना प्रभारी के साथ गाली-गलौज करते हुए जातिसूचक शब्द कहे थे। जिसके बाद उनके खिलाफ थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी तरह वर्ष 2019 में आजसू के कार्यकर्ता बालेश्वर राम की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

जिसमें कहा गया कि योगेंद्र साव ने उन्हें फोन पर जातिसूचक शब्द कहते हुए तेली समाज के साथ रहने को कहा था, क्योंकि तेली समाज ही उनका संरक्षण कर सकता है। ऐसा नहीं करने पर उड़ाने की धमकी थी। दोनों मामलों में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने योगेंद्र साव को बरी कर दिया।

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