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निजी अस्पतालों की रैवये पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कोरोना में सेवा की बजाय अस्पताल नोट छापने की मशीन बन गए हैं

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 20 Jul, 2021
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New Delhi: देश के अस्पतालों (Private Hospital) के रवैये और उनके काम के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कोरोना महामारी (Covid-19) के दौर में अस्पताल मानवता की सेवा करने के बजाए बड़े रियल एस्टेट उद्योग की तरह हो गए हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया कि आवासीय इलाकों में दो-तीन कमरे के फ्लैट में चलने वाले ‘नर्सिंग होम’ आग और भवन सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं, इसलिए उन्हें बंद किया जाना चाहिए।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि अस्पताल कठिनाई के समय में रोगियों को राहत प्रदान करने के लिए होते हैं न कि नोट छापने की मशीन होते हैं। आपदा के इस समय में अस्पताल बड़े उद्योग बन गए हैं और आवासीय कॉलोनी में दो-तीन कमरे के फ्लैट से चलने वाले इस तरह के नर्सिंग होम को काम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

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कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब देशभर के अस्पतालों पर कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लापरवाही और इलाज के लिए मनमाने चार्ज वसूलने के आरोप लगे हैं। अदालत ने भवन उपनियमों के उल्लंघन में सुधार लाने के लिए समय सीमा अगले वर्ष जुलाई तक बढ़ाने पर गुजरात सरकार की खिंचाई की।

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अदालत ने कहा कि पूर्णाधिकार पत्र अधिसूचना शीर्ष अदालत के 18 दिसंबर के आदेश के विपरीत है और ऐसी स्थिति में आग लगने की घटनाओं से लोग मरते रहेंगे। पीठ ने कहा कि बेहतर है कि इन अस्पतालों को बंद कर दिया जाए और सरकार को आवश्यक सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। हम इन अस्पतालों एवं नर्सिंग होम को काम जारी रखने की अनुमति नहीं दे सकते । यह मानवीय आपदा है।

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अदालत ने महाराष्ट्र के नासिक का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की जहां पिछले वर्ष कुछ रोगी और नर्स मारे गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि गुजरात सरकार को अधिसूचना वापस लेनी होगी और कहा कि यह पिछले वर्ष के आदेश के खिलाफ प्रतीत होता है। न्यायालय ने यह अधिसूचना जारी करने के बारे में एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है।

कोर्ट ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के मुद्दे पर एक आयोग द्वारा सील कवर में दायर रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया और कहा कि यह नाभिकीय गोपनीयता नहीं है बल्कि रिपोर्ट है। सील कवर में क्यों दिया गया अदालत ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से अधिसूचना के मुद्दे पर गौर करने और गुजरात सरकार के समक्ष इसे उठाने के लिए कहा।

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राज्य सरकार को पिछले वर्ष शीर्ष अदालत के फैसले के अनुपालन में कराए गए अग्नि सुरक्षा ऑडिट का ब्यौरा एवं अधिसूचना पर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया। कोविड-19 रोगियों के उचित इलाज पर स्वत: संज्ञान से लिए गए मामले की सुनवाई कोर्ट कर रहा था। उसने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 2 हफ्ते बाद तय की है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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