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मेडिकल नामांकनः दो आवासीय प्रमाण पत्र पर नामांकन मामले में हाईकोर्ट ने कहा- छात्रों से लें अंडर टेकिंग

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 09 Dec, 2020
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रांचीः झारखंड हाईकोर्ट में बिहार में आवासीय प्रमाणपत्र का लाभ लेने वाले 35 विद्यार्थियों को झारखंड में मेडिकल में नामांकन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर साल इस तरह का मामला सामने आता है।

इस पर रोक लगाने के लिए झारखंड राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद को नियम बनाना चाहिए। अभ्यर्थियों से आवासीय प्रमाण पत्र को लेकर अंडर टेकिंग लेनी चाहिए कि उनके पास एक ही राज्य का आवासीय प्रमाण पत्र है।

अदालत ने कहा कि वैसे छात्रों चिन्हित किया जाए जिन्होंने बिहार कोटे का लाभ लिया है। इस मामले में अदालत ने झारखंड राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद व राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। प्रार्थी विवेक कुमार ने इसको लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

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सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नीट की ओर से मेडिकल में नामांकन को लेकर परीक्षा आयोजित की गई थी। नीट एप्लीकेशन नंबर की जांच करने पर पता चला है कि बिहार में आवासीय प्रमाण पत्र का लाभ लेने वाले 35 विद्यार्थियों ने झारखंड कोटे में भी नामांकन को लेकर यहां का आवासीय प्रमाण पत्र दिया है।

इनकी काउंसिलिंग भी हो चुकी है। नियमानुसार कोई भी छात्र दो राज्यों में एक साथ आवासीय प्रमाण पत्र का लाभ नहीं ले सकता है। अगर ऐसे छात्रों का नामांकन झारखंड कोटे में होता है, तो यहां के छात्रों का हक मारा जाएगा। इसलिए दोहरा लाभ लेने वाले विद्यार्थियों के नामांकन पर रोक लगाई जाए।

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अदालत को बताया गया कि 31 दिसंबर को अंतिम काउंसिलिंग होगी। इस पर अदालत ने कहा कि जिन लोगों ने बिहार राज्य में कोटे का लाभ ले लिया है। उन्हें चिन्हित कर झारखंड कोटे की सूची से बाहर किया जाए, ताकि यहां के छात्रों को कोटे का लाभ मिल सके।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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