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खूंटी में मनरेगा में गड़बड़ी मामले में राज्य सरकार से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

मनरेगा की योजनाओं में हुई गड़बड़ी की जांच के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो को प्रतिवादी बनाने और प्रवर्तन निदेशालय को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

Ranchi: खूंटी जिले में मनरेगा की योजनाओं में हुई गड़बड़ी की जांच के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो को प्रतिवादी बनाने और प्रवर्तन निदेशालय को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अरूण कुमार दुबे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसए प्रसाद की अदालत ने यह निर्देश देते हुए सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की।

अदालत ने जनहित याचिका दायर करने वाले अरूण कुमार दुबे को नियमों के अनुसार अपना पूरा ब्योरा भी बताने का निर्देश अदालत ने दिया है। याचिका में खूंटी जिले में मनरेगा की योजनाओं में हुई गड़बड़ी के मामले में तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का आग्रह किया गया है। प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार ने अदालत को बताया कि मनरेगा योजनाओं की गड़बड़ी के लिए खूंटी जिले में 16 प्राथमिकी दर्ज की गयी है। लेकिन इसमें एक में भी तत्कालीन उपायुक्त को आरोपी नहीं बनाया गया है।

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जबकि मनरेगा एक्ट के तहत उपायुक्त कार्यक्रम समन्वयक होते हैं। उपायुक्त को योजनाओं के कार्यानव्यन और उसे पूरा होने का प्रमाणपत्र लेने के बाद ही राशि का भुगतान करना होता है, लेकिन योजनाएं अधूरी रहने के दौरान ही उपायुक्त ने इंजीनियरों को राशि निर्गत कर दी। योजनाएं पूरी हुए बिना ही पूरा भुगतान कर दिया गया। अदालत को बताया गया कि किसी भी मामले में उपायुक्त को आरोपी नहीं बनाया गया । इस मामले के आरोपी इंजीनियर के खिलाफ ईडी जांच भी हुई है।

ईडी ने भी इसमें अपनी फाइडिंग दी है, लेकिन सरकार इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इस तरह की अनियमितताओं के मामले में सरकार छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तो करती है, लेकिन जिम्मेवार अधिकारियों पर जांच नहीं होती। अदालत से खूंटी की तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरु करने का आग्रह अदालत से किया गया है। सुनवाई के बाद अदालत ने प्रार्थी को अपना पूरा ब्योरा देने तथा एसीबी को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने चार सप्ताह में इडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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