Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं होने पर सख्त रुख अपनाते हुए अब्दुल हकीम के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने पूर्व में अब्दुल हकीम को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था, लेकिन गुरुवार को वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने उसे 1 अप्रैल को हर हाल में कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है।
तथ्य छिपाने की आशंका पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में कुछ तथ्यों को छिपाए जाने की आशंका जताई। इससे पहले अदालत ने चतरा के एसपी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। यह मामला अख्तरी खातून द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है, जिसमें उनके बेटे के लापता होने की शिकायत की गई थी। सुनवाई के दौरान चतरा एसपी स्वयं अदालत में उपस्थित हुए और बताया कि टंडवा थाना प्रभारी अनिल उरांव और जांच अधिकारी अमित कुमार को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बयान में विरोधाभास, कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता का बेटा 6 फरवरी 2026 को घर लौट आया था। वहीं, एक कांस्टेबल के पत्र में उल्लेख था कि उसे पहले ही उसके मामा मोहम्मद गुलाम के हवाले कर दिया गया था। अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिका दाखिल करते समय याचिकाकर्ता, मोहम्मद गुलाम के साथ नहीं बल्कि अब्दुल हकीम के साथ आई थीं। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि 31 जनवरी को ही लड़के को मामा के सुपुर्द कर दिया गया था, तो 4 फरवरी को याचिका क्यों दाखिल की गई।स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले में सच्चाई छिपाने की कोशिश की गई है।