Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने प्रोबेट और लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों में संपत्ति मूल्य का 10 प्रतिशत कोर्ट फीस वसूलने की व्यवस्था को अवैध और अमान्य करार दिया है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि इतनी अधिक फीस आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालती है और यह असंगत है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अब ऐसे मामलों में भी सामान्य सिविल सूट की तरह अधिकतम तीन लाख रुपये ही कोर्ट फीस ली जाएगी। इसके साथ ही संबंधित याचिका का निष्पादन कर दिया गया।
याचिका में उठाया गया था मुद्दा
यह मामला विवेक गौरव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया था कि झारखंड में टाइटल सूट के लिए अधिकतम कोर्ट फीस तीन लाख रुपये तय है, जबकि प्रोबेट और लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन मामलों में संपत्ति के मूल्य का 10 प्रतिशत शुल्क लिया जा रहा था, जो असंवैधानिक और अनुचित है। अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए 10 प्रतिशत शुल्क को निरस्त कर दिया।
क्या होता है प्रोबेट और लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन
प्रोबेट और लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन ऐसे कानूनी दस्तावेज हैं, जिन्हें अदालत जारी करती है। इनके माध्यम से किसी मृत व्यक्ति की संपत्ति के प्रबंधन और वितरण की अनुमति मिलती है। प्रोबेट तब जारी किया जाता है जब मृतक ने वसीयत छोड़ी हो और उसमें निष्पादक (एक्सक्यूटर) का उल्लेख हो। वहीं, लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन तब जारी होता है जब वसीयत नहीं हो या उसमें किसी निष्पादक का नाम न हो। हाईकोर्ट के इस फैसले से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

