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Atrocities against SC-ST: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एससी-एसटी के खिलाफ अत्याचार अतीत की बात नहीं, समाज की हकीकत है

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 30 Oct, 2021
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New Delhi: Atrocities against SC-ST सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) एवं जनजाति (एसटी) के लोगों के खिलाफ अत्याचार कोई अतीत की चीज नहीं है, यह आज भी हमारे समाज की हकीकत है। लिहाजा उनके संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए संसद द्वारा बनाए गए प्रविधानों का पालन किया जाना चाहिए और पूरी जिम्मेदारी से लागू किए जाने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी राजस्थान हाईकोर्ट के एक आदेश को खारिज करते हुए की जिसने हत्या के एक मामले में आरोपी को जमानत प्रदान कर दी थी जबकि इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) कानून, 1989 के तहत दंडनीय अपराध भी शामिल थे।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ था और हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर विचार करते समय कानून की धारा-15ए के तहत शिकायतकर्ता को नोटिस नहीं जारी किया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जाति-आधारित अत्याचारों के कई अपराधी खराब जांच और अभियोजन की लापरवाही के कारण मुक्त हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप एससी / एसटी अधिनियम के तहत सजा की दर कम होती है, जिससे इस गलत धारणा को बल मिलता है कि दर्ज मामले झूठे हैं और इसका दुरूपयोग हो रहा है।

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पीठ ने कहा मौजूदा मामले में, यह स्पष्ट है कि नोटिस और सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन किया गया है। पीठ ने कहा कि जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कोई तर्क नहीं है और ऐसे आदेश पारित नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अपने छोटे भाई की हत्या के संबंध में पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने वाले व्यक्ति की ओर से दायर अपील की अनुमति देते हुए कहा कि आरोपी को सात नवंबर या उससे पहले आत्मसमर्पण करना होगा।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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