रेमडेसिविर कालाबाजारीः हाईकोर्ट ने कहा- जांच में न हो दखल, एडीजी अनिल पालटा की एसआईटी करेगी जांच

Remdesivir black marketing case रेमडेसिविर सहित कोरोना की दवा की कालाबाजारी मामले की जांच अब एसआईटी करेगी। इसका नेतृत्व एडीजी अनिल पालटा करेंगे।

Ranchi: रेमडेसिविर सहित कोरोना की दवा की कालाबाजारी मामले की जांच अब एसआईटी करेगी। इसका नेतृत्व एडीजी अनिल पालटा करेंगे। राज्य सरकार की सहमति के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने इस पर अपनी मुहर लगाई है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने कहा कि एडीजी अनिल पालटा को अपनी टीम चुनने की छूट होगी और उनकी जांच में कोई दखल नहीं देखा।

अदालत ने इस मामले में समय-समय पर जांच रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजेंद्र कृष्णा ने कहा कि इस मामले में आरोपी राजीव सिंह ट्रासफर होकर आने वाले एडीजी प्रशांत सिंह का नजदीकी है। ऐसे में जांच पर सवाल उठने लगे हैं।

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महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि सरकार इस मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन के लिए तैयार है और एडीजी, रेल अनिल पालटा ही इसका नेतृत्व करेंगे। सीआईडी एडीजी रहने के दौरान उनके द्वारा बनाई गई टीम ही इस मामले की जांच करेगी। एसआईटी की टीम डीजीपी को रिपोर्ट करेगी। इस पर अदालत ने सरकार की पेशकश को स्वीकार कर लिया।

डीएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा शपथपत्र दाखिल किए जाने पर कोर्ट ने पूछा कि क्या इस पर सरकार ने अपनी सहमित प्रदान की है। महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार की सहमति के बाद ही पुलिस मुख्यालय ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन की मंजूरी दी है। उन्होने कोर्ट को भी आश्वस्त किया कि अनिल पालटा ही एसआईटी का नेतृत्व करेंगे।

अदालत ने कहा कि अनिल पालटा जांच के लिए अपनी टीम का चुनाव कर सकते हैं और उन्हें किसी भी अन्य संसाधन की जरूरत होगी, तो वे अदालत में याचिका दाखिल कर इसकी जानकारी दे सकते हैं। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि एसआईटी जांच में कोई दखल नहीं देगा। क्योंकि कोर्ट पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रही है। अदालत भी इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहता है।

बता दें कि अनिल पालटा का सीआईडी एडीजी पद से ट्रांसफर करते हुए रेल का एडीजी बना दिया गया। उन्होंने कुछ दिनों पहले ही हाई कोर्ट के आश्वस्त किया था कि इस मामले की जांच प्रोफेशनल तरीके से की जा रही है। उन पर जांच में किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं है। उनके आश्वासन के दस दिनों बाद ही सरकार ने उनका ट्रांसफर कर दिया।

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