पोक्सो एक्टः पीड़िता को गवाह नहीं बनाने पर हाईकोर्ट नाराज, एसपी-डीआईजी व आइओ पर चलेगा अवमानना

POCSO Act झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाया है।

Ranchi: POCSO Act झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज करने और पीड़िता को गवाह नहीं बनाए जाने पर आश्चर्य जताया है। अदालत ने इसे पुलिस की घोर लापरवाही मानते हुए हुए राज्य के डीजीपी को खुद जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि साहिबंगज की निचली अदालत ने एसपी, डीआईजी और डीजीपी को पीड़िता को गवाह बना कर कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया, लेकिन अदालत के आदेश का पालन भी नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि इससे साफ प्रतीत होता है कि कि आरोपी को बचाने के लिए पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया और अदालत के निर्देशों की परवाह भी नहीं की।

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अदालत ने डीजीपी को यह बताने को कहा है कि इस तरह की लापरवाही क्यों बरती गयी। जांच में लापरवाही बरतने वालों पर क्या कार्रवाई की गयी। हाइकोर्ट के इस आदेश की प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी भेजने का निर्देश अदालत ने दिया।

क्यों न चले अवमानना का मामला
हाईकोर्ट ने साहेबगंज के एसपी, डीआईजी और मामले के अनुसंधानकर्ता को अवमानना का नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है। सभी को यह बताने को कहा है कि निचली अदालत ने जब पीड़िता को गवाह बनाने और कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था, तो उसका पालन क्यों नहीं किया गया। सभी को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश कोर्ट ने दिया।

यह है पूरा मामला
पीडि़ता के साथ वर्ष 2018 में दुष्कर्म हुआ था। आरोपी अनिल कुंवर पर साहिबगंज की मिर्जा चौकी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है और अभी वह जेल में है। अनिल ने जमानत के लिए हाइकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात आयी की पीड़िता को पुलिस ने गवाह ही नहीं बनाया है।

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