कोलेजियम की सिफारिशों पर बढ़ा विवाद
Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर गंभीर असंतोष उभर कर सामने आया है। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट के कोलेजियम—जिसमें चीफ जस्टिस और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल हैं—ने उन नामों को नजरअंदाज कर दिया है जिन पर पहले गंभीरता से विचार किया जा रहा था। स्थानीय बार का आरोप है कि पिछले आठ वर्षों में हाई कोर्ट के बार से एक भी अधिवक्ता को जज के रूप में ऊंचे पद पर प्रमोट नहीं किया गया।
योग्यता से ऊपर व्यक्तिगत हित?
स्रोतों का दावा है कि चयन प्रक्रिया योग्यता के बजाय व्यक्तिगत हित, लॉबी और भाई-भतीजावाद से संचालित हो रही है। यही कारण है कि स्थानीय बार के योग्य और अनुभवी अधिवक्ताओं के नाम बार-बार खारिज होते रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि योग्य उम्मीदवारों की जगह उन नामों को आगे बढ़ाया जा रहा है जो किसी न किसी कोलेजियम सदस्य के करीबी हैं।
सेवानिवृत्ति और कमी के बीच नई सूची विवादों में
दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में होने वाली महत्वपूर्ण सेवानिवृत्तियों के बीच, कोलेजियम सात अधिवक्ताओं के नाम सुप्रीम कोर्ट भेजने की तैयारी कर रहा है। लेकिन विवाद का केंद्र यही सूची है। दावा किया जा रहा है कि इस सूची में 55 वर्ष से अधिक आयु वाले व कम प्रैक्टिस अनुभव वाले अधिवक्ताओं को शामिल किया गया है। स्रोतों के अनुसार, ऐसा जानबूझकर किया गया है ताकि सुप्रीम कोर्ट इस सूची को खारिज कर दे, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया रुक जाए और भविष्य में ‘पसंदीदा’ अधिवक्ता पात्रता प्राप्त कर सकें।
पहले भी हो चुका है विरोध—पुरानी सूची हटाई गई
यह विवाद कोई नया नहीं है। कुछ समय पूर्व जब पूर्व चीफ जस्टिस ने छह अधिवक्ताओं के नाम भेजे थे, तब भी कोलेजियम के एक सदस्य ने तीखे असहमति नोट दर्ज किए थे। बार का कहना है कि उस समय भी ऐसे नाम शामिल किए गए थे जिनके पास झारखंड हाई कोर्ट का नियमित अभ्यास अनुभव नहीं था। स्रोतों का यह भी कहना है कि उसी सदस्य ने अपने पसंदीदा नामों के अभाव में छह में से सभी नामों पर असहमति जताई थी और इस बार भी उसी दबाव में पूर्व पैनल के लगभग सभी नाम सूची से हटा दिए गए।
पिछली सूची में कई योग्य, ईमानदार और उत्कृष्ट आयु-प्रोफाइल वाले अधिवक्ता शामिल थे।
बढ़ता असंतोष: “डर्टी पॉलिटिक्स” ने रोकी प्रतिभाओं की राह
बार से जुड़े कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि हाई कोर्ट की नियुक्तियों में चल रही इस “डर्टी पॉलिटिक्स” ने कई योग्य व सक्षम अधिवक्ताओं के elevation की संभावनाओं को खत्म कर दिया है। उनका कहना है कि बार के प्रतिभाशाली अधिवक्ता इस खींचतान और मनमानी का शिकार हो रहे हैं।
जजों की भारी कमी से प्रभावित हो रही न्यायिक व्यवस्था
झारखंड हाई कोर्ट गंभीर जजों की कमी से जूझ रहा है:
- स्वीकृत पद : 25 (20 स्थायी + 5 अतिरिक्त)
- कार्यरत जज : 15
- रिक्ति : 10 पद (40% कमी)
- अतिरिक्त जजों के सभी 5 पद खाली
इस भारी कमी से न्यायिक प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित है। कार्यरत जजों पर काम का अत्यधिक दबाव है, लंबित मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है और न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता पर सीधा असर पड़ रहा है।
न्यायपालिका पर भरोसा बचाने की चुनौती
जजों की नियुक्ति को लेकर जारी यह विवाद न केवल हाई कोर्ट के अंदरूनी वातावरण को प्रभावित कर रहा है बल्कि न्यायपालिका में जनता के भरोसे पर भी सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय बार का कहना है कि अगर स्थिति नहीं बदली तो इससे न्याय व्यवस्था और अधिक जटिल हो जाएगी। झारखंड हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति पर यह असंतोष आने वाले दिनों में और गंभीर बहस का कारण बन सकता है।……यह खबर सूत्रों से मिली जानकारी और अधिवक्ताओं से मिली जानकारी पर आधारित…….