Civil Court News

CBI Court News: बड़ी राहत: गबन के आरोपी रांची के तत्कालीन पोस्टमास्टर और 2 ट्रेजरर साक्ष्य के अभाव में बरी

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 28 Mar, 2026
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Ranchi News: राजधानी के डोरंडा मुख्य डाकघर (HPO) में नोटबंदी के दौरान हुए कथित लाखों रुपये के गबन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में तत्कालीन एक्टिंग पोस्टमास्टर और दो ट्रेजरर सहित तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने डोमिनिक जोसेफ मिंज: तत्कालीन कार्यवाहक पोस्टमास्टर (Officiating Post Master), शिव रंजन प्रसाद तत्कालीन ट्रेजरर और चेपो उरांव तत्कालीन डाक सहायक को बरी किया। सीबीआई की बड़ी हार है।

क्या था मामला? यह मामला नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के समय का है। सीबीआई का आरोप था कि 8 नवंबर से 11 नवंबर 2016 के बीच डोरंडा डाकघर के अधिकारियों ने मिलीभगत कर सरकारी खजाने में हेराफेरी की। आरोप के मुताबिक, नई और पुरानी करेंसी के मिलान में गड़बड़ी कर लगभग 4.82 लाख रुपये (3,33,500 और 1,49,422 रुपये के दो अलग-अलग हिस्से) का गबन किया गया था। सीबीआई ने इस मामले में आईपीसी की धारा 409, 120B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

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इन आरोपियों को मिली राहत: अदालत ने जिन तीन लोगों को बरी किया है, उनमें शामिल हैं:

बचाव पक्ष की दलीलें आईं काम: सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि सीबीआई का पूरा केस काल्पनिक और गणना की भूल पर आधारित है। अदालत को बताया गया कि डाकघर के रिकॉर्ड और वास्तविक नकदी में कोई अंतर नहीं था। दलील दी गई कि नोटबंदी के समय भारी काम के दबाव के बीच केवल रफ शीट पर लिखे गए नोटों के विवरण को आधार बनाकर गबन का आरोप मढ़ दिया गया, जबकि ऑडिट और जनरल निरीक्षण में कोई भी अनियमितता नहीं पाई गई थी।

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कोर्ट का फैसला: विशेष सीबीआई अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। साक्ष्यों की कमी को देखते हुए अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश जारी किया।

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