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यौन उत्पीड़न केसः सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI रंजन गोगोई के खिलाफ मामला किया बंद, कहा- साजिश से इन्कार नहीं

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 18 Feb, 2021
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Former CJI Ranjan Gogoi
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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज सुनवाई को बंद कर दिया है। अदालत ने कहा कि केस में दो साल बीत चुके हैं। ऐसे में साजिश की जांच में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हासिल करने की संभावना बहुत कम रह गई है।

जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में 1 साल 9 महीने बाद गुरुवार को सुनवाई शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने जस्टिस गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोपों के पीछे साजिश होने का दावा किया था।

जस्टिस एके पटनायक को इस मामले में साजिश की जांच करने का काम सौंपा गया था। अदालत ने कहा कि जस्टिस पटनायक की रिपोर्ट में साजिश को स्वीकार किया गया है और इसे खारिज नहीं किया जा सकता।

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जस्टिस गोगोई ने CJI रहते हुए कुछ कड़े फैसले किए जो साजिश को बल देते हैं। रिपोर्ट में एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के इनपुट का हवाला भी है। इसमें बताया गया है कि असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को आगे बढ़ाने की वजह से कई लोग जस्टिस गोगोई से नाखुश थे।

इस मामले की अंतिम सुनवाई 25 अप्रैल 2019 को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने की थी। तब अदालत ने इसकी जांच करने का फैसला किया था कि ये आरोप CJI और कोर्ट की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की साजिश तो नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। यह महिला 2018 में जस्टिस गोगोई के आवास पर बतौर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पदस्थ थी। महिला का दावा था कि बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया था।

महिला ने अपने हलफनामे की कॉपी 22 जजों को भेजी थी। इसी आधार पर चार वेब पोर्टल्स ने चीफ जस्टिस के बारे में खबर प्रकाशित की। अप्रैल 2019 में मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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