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HC News: मॉरीशस के SSR मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन पीएन सिंह और रंजीत कौर को HC से बड़ी राहत, धोखाधड़ी का मामला निरस्त

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By Devesh Ananad On 01 Sep, 2026
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Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट ने मॉरीशस के एसएसआर मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन प्रताप नारायण सिंह और चेयरमैन की सचिव रंजीत कौर के खिलाफ अरगोड़ा थाना में दर्ज धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों को सही मानने के बावजूद आईपीसी की धारा 406, 420 और 120बी के अपराध नहीं बनते।

अदालत ने माना कि आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने प्रताप नारायण सिंह और रंजीत कौर की ओर से याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। मामला अरगोड़ा से जुड़ा था। दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया था।

छात्र को पांच साल पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप

मामले के शिकायतकर्ता का आरोप था कि उनका बेटा कैरव किर्तने 2019-2024 सत्र में एसएसआर मेडिकल कॉलेज, मॉरीशस में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दाखिल हुआ था। शिकायत में कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों पर उसे कक्षा और परीक्षा के दौरान परेशान करने तथा अनुचित तरीके अपनाने का आरोप लगाया गया था।

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यह भी आरोप था कि छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के नाम पर 3000 अमेरिकी डॉलर लिए गए, इसके बावजूद उसे प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा में फेल कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने करीब 49.63 लाख रुपये की आर्थिक क्षति का भी आरोप लगाया था।

चेयरमैन की ओर से कहा गया- छात्र ने खुद छोड़ी पढ़ाई

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली स्थित कॉलेज का कार्यालय केवल संपर्क कार्यालय था और छात्र ने अपनी इच्छा से मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। कॉलेज की ओर से किसी तरह का प्रलोभन नहीं दिया गया था। फीस भी कॉलेज चलाने वाले ट्रस्ट के मॉरीशस स्थित बैंक खाते में जमा हुई थी।

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याचिकाकर्ताओं के अनुसार छात्र ने करीब साढ़े चार साल पढ़ाई करने के बाद खुद ही कोर्स छोड़ दिया था। उसकी उपस्थिति केवल 46 प्रतिशत थी, जबकि 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य थी।

फीस जमा करना अमानत में खयानत नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 406 के तहत अपराध के लिए किसी संपत्ति या रकम का आरोपी को विशेष उद्देश्य से बतौर अमानत सौंपा जाना और उसका दुरुपयोग किया जाना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज की फीस का भुगतान सामान्य वित्तीय या संविदात्मक लेन-देन है। इसे धारा 405 के अर्थ में अमानत नहीं माना जा सकता। इसलिए धारा 406 के तहत अपराध नहीं बनता।

शुरुआत से धोखा देने का आरोप नहीं

धारा 420 पर अदालत ने कहा कि धोखाधड़ी का अपराध तभी बनता है, जब लेन-देन की शुरुआत से ही आरोपी की धोखा देने की नीयत हो। इस मामले में याचिकाकर्ताओं के शिकायतकर्ता या उनके बेटे से सीधे संपर्क करने अथवा शुरुआत से धोखा देने का कोई आरोप नहीं है।

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छात्र करीब साढ़े चार साल तक कॉलेज में पढ़ता रहा। ऐसे में कोर्ट ने माना कि शुरुआत से धोखा देने की नीयत साबित करने वाला आरोप मौजूद नहीं है। चूंकि धारा 406 और 420 के तहत अपराध ही नहीं बनते, इसलिए कोर्ट ने कहा कि आपराधिक साजिश यानी धारा 120बी का मामला भी नहीं बनता। इसके बाद हाईकोर्ट ने अरगोड़ा थाना कांड संख्या 199/2024 की पूरी आपराधिक कार्यवाही को दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ रद्द कर दिया और याचिका स्वीकार कर ली।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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